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लखनऊ: ललित कला अकादेमी के ‘वर्धनी’ कार्यक्रम में प्राची अग्रवाल और तान्या गुप्ता की कला प्रस्तुति

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‘वर्धनी’ कार्यक्रम में युवा कलाकारों को मिला मंच

विवेक कुमार गुप्ता।

लखनऊ। ललित कला अकादेमी, क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा अलीगंज स्थित अकादेमी परिसर में “वर्धनी” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अकादेमी के प्रतिभाशाली स्कॉलर्स की कला-यात्रा को कला प्रेमियों और प्रबुद्ध जनसमूह के समक्ष एक मंच प्रदान करना था। कार्यक्रम के दौरान पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से युवा कलाकारों प्राची अग्रवाल (मूर्तिकला) एवं तान्या गुप्ता (पेंटिंग) ने अपनी कलात्मक दृष्टि, शोध और सृजन प्रक्रिया के अनछुए पहलुओं को साझा किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उमेंद्र प्रताप सिंह और क्षेत्रीय सचिव, ललित कला अकादेमी, डॉ. देवेन्द्र त्रिपाठी द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर क्षेत्रीय सचिव ने हाल ही में संस्कृति मंत्रालय द्वारा फेलोशिप से पुरस्कृत कलाकारों रश्मि श्रीवास्तव (सीनियर फैलोशिप), धीरज यादव को (जूनियर फैलोशिप), रंजना मिश्रा (जूनियर फैलोशिप) और प्रतीक मिश्रा (यंग आर्टिस्ट्स स्कॉलरशिप) को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। इन सभी कलाकारों की उपलब्धि समाज और कला जगत के लिए प्रेरणादायक है।

युवा कलाकारों ने पेश किए मूर्तिकला और चित्रकला के अनूठे आयाम

कार्यक्रम को आगे बढाते हुए ललित कला अकादेमी, क्षेत्रीय केन्द्र में मूर्तिकला में सक्रिय स्कॉलर कु. प्राची अग्रवाल ने अपनी प्रस्तुति में माध्यमों की विविधता और उनकी चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने मार्बल (संगमरमर), सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) और टेराकोटा की ईंटों को तराशने की अपनी अनूठी कलात्मक यात्रा को साझा किया। कु. प्राची ने टेराकोटा की ईंटों को माध्यम बनाकर ‘समकालीन मानवीय आकृतियों’ को जिस कुशलता के साथ आकार दिया है, वह सराहनीय है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पत्थर की निर्जीव कठोरता को काट-छाँटकर उसमें मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं का संचार किया जाता है। उनकी कलाकृतियाँ वर्तमान युग की जटिलताओं और मानवीय संघर्षों का एक सशक्त प्रतिबिंब हैं।

चित्रकला की स्कॉलर कु. तान्या गुप्ता ने अपनी कला-यात्रा को ‘मातृत्व’ के भावों के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उनकी कला की प्रेरणा मुख्य रूप से उनकी ‘माँ’ हैं, जिनका प्रभाव उनके व्यक्तित्व और सृजन दोनों पर गहरा है। तान्या ने पेपर और कैनवास पर रंगों के संयोजन से मातृत्व की कोमलता, शक्ति और सुरक्षा के भावों को उकेरा है। उनकी प्रस्तुति में रंगों का चयन और रेखाओं का प्रवाह दर्शकों को एक भावनात्मक यात्रा पर ले गया। तान्या की कृतियाँ यह सिद्ध करती हैं कि कैसे व्यक्तिगत अनुभवों को कला के माध्यम से एक व्यापक और सार्वभौमिक रूप दिया जा सकता है।

उमेंद्र प्रताप सिंह ने बढ़ाया युवा कलाकारों का उत्साह

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तथा कला जगत के वरिष्ठ हस्ताक्षर एवं प्रख्यात कलाकार उमेंद्र प्रताप सिंह ने दोनों स्कॉलर्स के कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “आज के युवा कलाकारों में जिस प्रकार प्रयोगधर्मिता और अपनी जड़ों के प्रति सम्मान का भाव दिख रहा है, वह भारतीय कला जगत के लिए अत्यंत सुखद है।” उन्होंने तान्या और प्राची को निरंतर शोध और अभ्यास के प्रति प्रोत्साहित किया और युवा कलाकारों के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर सार्थक संवाद स्थापित किया।

ललित कला अकादेमी के क्षेत्रीय सचिव डॉ. देवेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि “वर्धनी कार्यक्रम केवल एक औपचारिक व्याख्यान सत्र नहीं था, बल्कि यह कला को जन-जन तक पहुँचाने की एक सार्थक पहल साबित हुआ”। अकादेमी परिसर में उपस्थित कला प्रेमियों, शिक्षकों और अन्य विद्यार्थियों ने युवा कलाकारों की इस प्रस्तुति में गहरी रुचि दिखाई और उनसे संवाद किया। इस अवसर पर केन्द्र में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे |

ललित कला अकादेमी, क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ का यह प्रयास निश्चित रूप से कला के संरक्षण और नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर कार्यक्रम के अंत में अकादेमी द्वारा सभी प्रतिभागियों और सम्मानीय अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।

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