लखनऊ में 24 अक्टूबर को लगेगा दिवाली मेला, भदोही की कालीन से बनारसी साड़ी तक मिलेंगे खास उत्पाद
लखनऊ। लखनऊ में इस बार दिवाली की खरीदारी के साथ उत्तर प्रदेश की हस्तशिल्प कला और महिला उद्यमियों के हुनर को करीब से जानने का मौका मिलेगा। उत्तर प्रदेश आईएएस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन ( UP IASOWA) पहली बार 24 अक्टूबर को दिवाली मेले का आयोजन कर रहा है। इसमें भदोही की कालीन, खुर्जा के मिट्टी के बर्तन, फिरोजाबाद की चूड़ियां और बनारसी साड़ियां सहित कई पारंपरिक उत्पाद एक ही जगह मिलेंगे। खास बात यह है कि मेले में उन महिलाओं के बनाए मसाले और नाश्ते के उत्पाद भी रखे जाएंगे, जिन्हें एक सामाजिक पहल के जरिए रोजगार मिला है।
यह मेला राजभवन कॉलोनी स्थित सीएसआई क्लब के सामने वाले लॉन में सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक लगेगा। इसमें हस्तशिल्पियों, महिला उद्यमियों, छोटे कारोबारियों और सामाजिक कल्याण से जुड़े संगठनों को एक मंच पर लाया जाएगा। खरीदारों के लिए चिकनकारी, बुनी हुई साड़ियों, मीनाकारी के गहनों, कांच की चूड़ियों और जरदोजी की जूतियों से लेकर कालीन, सिरेमिक उत्पाद, पीतल के सामान, मोमबत्तियों और घर सजाने की वस्तुओं तक कई विकल्प उपलब्ध होंगे।
UP के पारंपरिक उत्पादों के साथ दूसरे राज्यों की कला और शिल्प भी देखने को मिलेंगे
मेले में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों के साथ दूसरे राज्यों की कला और शिल्प भी देखने को मिलेंगे। चंदेरी की साड़ियां, जयपुर के कपड़े और जूते, कच्छ के गहने तथा बाटिक प्रिंट के उत्पाद भी बिक्री के लिए रखे जाएंगे। इसके अलावा क्रोशिया से बने सामान, पोटली और उपहारों की सजावटी पैकिंग से जुड़े उत्पाद भी मिलेंगे। इस तरह लोग दिवाली पर घर सजाने, कपड़े खरीदने और उपहार देने के लिए अलग-अलग तरह की वस्तुएं एक ही स्थान पर देख सकेंगे।
मेले का एक अहम हिस्सा महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली पहल होगी। एसोसिएशन की सामाजिक सेवा इकाई आकांक्षा समिति के मसाला मठरी केंद्र के उत्पाद भी यहां उपलब्ध होंगे। समिति के अनुसार, लखनऊ स्थित इस केंद्र ने 100 से अधिक महिलाओं को रोजगार दिया है। यहां तैयार मसाले और नाश्ते के उत्पादों को मेले के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि महिलाएं अपने काम को आगे बढ़ा सकें और उनके उत्पादों को बाजार मिल सके।
दिवाली की खरीदारी के साथ महिला उद्यमियों को बढ़ावा
महिला शरणालय में तैयार हस्तनिर्मित उत्पाद भी मेले में बिक्री के लिए रखे जाएंगे। इसके अलावा दृष्टि एनजीओ भी भाग लेने वाले संगठनों में शामिल है। इन संस्थाओं की भागीदारी से लोगों को पारंपरिक हस्तशिल्प और व्यावसायिक उत्पादों के साथ सामाजिक कल्याण से जुड़ी पहलों के तहत तैयार वस्तुएं खरीदने का अवसर मिलेगा। आयोजकों का कहना है कि मेले का उद्देश्य महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और कारोबार बढ़ाने के लिए मंच उपलब्ध कराना भी है।
मेले में खरीदारी के अलावा परिवारों के मनोरंजन का भी इंतजाम रहेगा। यहां खाने-पीने के स्टॉल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, खेल और बच्चों के लिए गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाले इस आयोजन में लोग दिन और शाम, दोनों समय आकर खरीदारी और मनोरंजन का आनंद ले सकेंगे। मेले में आने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य शिविर और पैथईजी लैब्स की ओर से रक्त जांच की सुविधा भी प्रस्तावित है।
जीवनशैली और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां भी देखने को मिलेंगी
आयोजन में कुछ अन्य खास स्टॉल भी शामिल होंगे। इनमें बडीज पेट केयर के पालतू जानवरों के भोजन और सोल पाथ विद अनु की ओर से टैरो रीडिंग की सुविधा शामिल है। इस तरह मेले में पारंपरिक खरीदारी के साथ जीवनशैली और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां भी देखने को मिलेंगी। अलग-अलग तरह के उत्पादों और सेवाओं की मौजूदगी इसे दिवाली की खरीदारी के लिए विविध विकल्पों वाला आयोजन बनाएगी।
आकांक्षा समिति की स्थापना 1987 में यूपी आईएएसओवा की सामाजिक सेवा इकाई के रूप में हुई थी। यह संस्था महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और आय बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियों पर काम करती है। दिवाली मेले में समिति की आजीविका पहल से जुड़े उत्पादों को पारंपरिक शिल्प और अन्य कारोबारियों के साथ जगह दी जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं को खरीदारों तक पहुंचाने और महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का अवसर मिलेगा।
