आस्था और अंधविश्वास के बीच चर्चा का विषय है यहां की अनोखी परंपरा
संजय मिश्र।
गोपालगंज। आइए,आपको लेकर चलते उतर प्रदेश के देवरिया जिले से सटे बिहार के गोपालगंज जिले के एक ऐसे मंदिर में जहां नवरात्रि के समय में भूत-प्रेतों का मेला लगता है। बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित लछवार दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। जिला मुख्यालय के पास स्थित इस मंदिर में सालभर भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मां दुर्गा को समर्पित इस मंदिर को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां प्रेत बाधा से मुक्ति की कामना लेकर भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं। यही वजह है कि यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी अनूठी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है।
गोपालगंज जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दक्षिण में थावे प्रखंड के लछवार गांव में स्थित वामत देवी के नाम से मशहूर दुर्गा मंदिर अपनी चमत्कारों और भूतों के मेले के रहस्य के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध है।इस मंदिर में आने मात्र से भूत -प्रेत की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।यह मंदिर विशेषकर उन लोगों के लिए है ,जो भूत -प्रेत की आत्माओं से पीड़ित हैं। यहां हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्रि में दूर – दूर से भक्त आतें है। ऐसा मान्यता है कि, यहां आने वाले भक्तों को मां दुर्गा भवानी की दर्शन मात्र से उनके दुःख व रोग नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि, लोग ऐतिहासिक लछवार धाम को प्रेत बाधा से मुक्ति धाम भी कहते हैं। यहां लगने वाले भूतों की मेला में आस पास के जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश और नेपाल से भारी संख्या में भक्त जिसमें महिलाएं,पुरुष और बच्चे मां दुर्गा का दर्शन करने आते हैं और असाध्य पीड़ा से मुक्ति पाकर अपने घरों को लौटते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि,लोगों को सताने वाले भूत -प्रेत को सजा मातारानी देती हैं।

भूत – प्रेत जैसी नकारात्मक शक्तियों को लोहे की बेड़ियों में बांध दिया जाता है। यहां आने वाले भक्त वामत देवी के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हैं और उनके शरीर के भीतर भूत – प्रेतों का असर दिखने लगता है। यहां हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्रि में अजब नजारा देखने को मिलता है, कहीं औरतें जोर – जोर से सिर हिला रहीं होती तो कहीं लोग झूमते या पेड़ों पर चढ़ जाते हैं।जिसे स्थानीय भाषा में भूत खेलना कहा जाता है।लोगों का मानना है कि शरीर में मौजूद प्रेत आत्माएं माता की प्रकोप या शक्ति से बाहर आती है।
लछवार मंदिर की मान्यताएं और स्थापना की कहानी
ऐसी मान्यता है कि,वामत देवी के परिसर की मिट्टी के स्पर्श मात्र से प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है। पूजा पाठ करने, मिट्टी में लोटने तथा यहां के बाबा द्वारा दिया जाने वाले भभूत खाने से प्रेत बाधा से छुटकारा मिल जाता है। बुरी आत्माएं शरीर छोड़ कर चली जाती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि, पहले लछवार मंदिर गांव के पश्चिम दिशा में स्थापित था। करीब सौ साल पूर्व नारायण टोला सिंहपुर ग्राम निवासी बाबा कल्लू पांडेय को देवी ने दर्शन दिया और कहा कि मेरे इस स्थान को गांव के पूरब दिशा में ले चलो। इसके बाद बाबा ने नारायण पुर पंडित टोला के पूरब दिशा में स्वयं की जमीन में देवी की पिंडी रख,उसी स्थान पर कोठरी बनाकर निवास करने लगे।इसी बीच लोग देवी स्थान का दर्शन करने आने लगे। श्रद्धालुओं की मुरादें पूरी होने की बात धीरे धीरे फैलती गई।आज इस मंदिर में असाध्य रोग और प्रेत बाधा मुक्ति के लिए आते हैं।
इसे आस्था कहें या अंधविश्वास?
विज्ञान और तकनीक के इस आधुनिक दौर में भी भूत-प्रेत और अलौकिक शक्तियों से जुड़ी मान्यताएं समाज के कई हिस्सों में प्रचलित हैं। एक ओर लोग इन मान्यताओं को धार्मिक आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं, तो दूसरी ओर इनके पीछे मौजूद अंधविश्वास और सामाजिक परिस्थितियों पर भी सवाल उठते हैं। कई बार ऐसी मान्यताओं का फायदा उठाकर कुछ लोग भोले-भाले लोगों को गुमराह करते हैं और उनकी भावनाओं का अनुचित लाभ उठाते हैं।
गोपालगंज के लछवार दुर्गा मंदिर को लेकर भी लोगों के बीच अलग-अलग धारणाएं देखने को मिलती हैं। मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्त इस मंदिर को आस्था का प्रमुख केंद्र मानते हैं। वहीं, प्रेत बाधा से मुक्ति मिलने से जुड़ी मान्यताओं को लेकर यह सवाल भी उठता है कि किसी धार्मिक विश्वास और अंधविश्वास के बीच अंतर कैसे किया जाए।
धर्म और आस्था व्यक्तिगत विश्वास का विषय हैं। मंदिरों में पूजा-अर्चना करने से लोगों को मानसिक शांति, संबल और उम्मीद मिल सकती है। हालांकि, भूत-प्रेत की मौजूदगी या किसी धार्मिक अनुष्ठान से ऐसी कथित बाधाओं के दूर होने के दावों को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर परखना जरूरी है। केवल किसी परंपरा के लंबे समय से चले आने से उसकी हर मान्यता को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
समाज के लिए जरूरी है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए लोगों में वैज्ञानिक सोच और जागरूकता को भी बढ़ावा दिया जाए। किसी व्यक्ति को डराकर, बीमारी या मानसिक परेशानी को प्रेत बाधा बताकर उसका आर्थिक या शारीरिक शोषण करना गलत है। ऐसी परिस्थितियों में जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेना भी महत्वपूर्ण है।
