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गौशालाओं में निःशुल्क बोरिंग कराई जाए ताकि पानी की कोई कमी न हो

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  • ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों एवं स्वच्छ ईधन को बढ़ावा देने के लिए गोबर गैस (बायोगैस) के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए
  • प्रदेश की प्रत्येक गौशाला में न्यूनतम 10 कुन्टल भूसे के आरक्षित भण्डार की अनिवार्यता
  • 15 मई तक गोचर भूमि पर हाईब्रिड नेपियर की रोपाई हेतु रूटस्लीप फार्मों से प्राप्त कर चारा उत्पादक किसानों को तथा गोआश्रय स्थलों को तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए – धर्मपाल सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा है कि राज्य में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों एवं स्वच्छ ईधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गोबर गैस (बायोगैस) के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। गोबर के माध्यम से निर्मित गोबर गैस न केवल सस्ता और स्वच्छ ईधन है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए गौशालाओं में गोबर का सदुपयोग सुनिश्चित किया जाये। श्री सिंह ने गर्मी के दृष्टिगत गौशालाओं में त्रिपाल, हरा चारा, पानी, भूसा एवं अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थायें करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी गौशालाओं में निःशुल्क बोरिंग भी कराई जाए ताकि पानी का किसी भी प्रकार से अभाव न हो।
पशुधन मंत्री ने आज यहां विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में निराश्रित गोवंश के बेहतर भरण पोषण के लिए भूसा बैंक और गोचर भूमि के विस्तार कार्यों को गति देने के लिए दिनांक 28 मार्च से 05 अप्रैल तक प्रदेश के सभी 18 मण्डलों की गोशालाओं में निरीक्षण करने गये नोडल अधिकारियों की बैठक की। मंत्री ने प्रदेश की प्रत्येक गौशाला में न्यूनतम 10 कुन्टल भूसे के आरक्षित भण्डार की अनिवार्यता के निर्देश दिए। कहा कि 15 अप्रैल से प्रारम्भ विशेष भूसा संग्रह अभियान में दान एवं क्रय द्वारा भूसा भण्डारण किया जाए। गेहूं की कटाई के दृष्टिगत स्थानीय किसानों से न्यूनतम (400 से 650 रूपये कु0) दर पर उपलब्ध भूसा क्रय करके अस्थाई भूसा गोदामों, खाली पड़े पशु सेवा केन्द्रों/पशु चिकित्सा के भवनों/बन्द अस्थाई गोआश्रय स्थलों के पशु शिविर का प्रयोग भूसा भण्डारण हेतु किया जाए। श्री सिंह ने कहा कि 15 मई तक गोचर भूमि पर हाईब्रिड नेपियर की रोपाई हेतु रूटस्लीप फार्मों से प्राप्त कर चारा उत्पादक किसानों को तथा गोआश्रय स्थलों को तत्काल उपलब्ध कराकर बुवाई सुनिश्चित कराई जाए। पूरे वर्ष हरे चारे की आपूर्ति हेतु स्थानीय किसानों से क्रय अनुबन्ध किये जाए। गोआश्रय स्थल की 04 किमी0 की परिधि में स्थित गोचर भूमि को संबद्ध कर चारा आच्छादन विस्तारित किया जाए।
बैठक में नोडल अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के उपरान्त गौशालाओं की अद्तन स्थिति से अवगत कराया। बताया गया कि प्रदेश में 7416 गोआश्रय स्थलों में 1237694 संरक्षित गोवंश हैं। मा0 मुख्यमंत्री सहभागिता योजनान्तर्गत 114481 लाभार्थियों को कुल 184227 गोवंश सुपुर्द किये गये हैं। 2500 से अधिक गोआश्रय स्थलों में आइसोलेशन कक्ष बनाकर बीमार/कमजोर गोवंशों की देखभाल की जा रही है। समय से फण्ड रिक्वेस्ट न भेजने वाले जनपदों मिर्जापुर, बांदा, चित्रकूट, फिरोजाबाद, बदायूं, संतकबीरनगर, महोबा, कन्नौज, बहराइच, बलरामपुर, उन्नाव, कानपुर देहात आदि को स्पष्टीकरण दिया गया है। जनपद रायबरेली, सीतापुर एवं उन्नाव में भी भूसा आपूर्ति कर्ताओं द्वारा लापरवाही बरतने पर आवश्यक कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गयी है। मृत गोवंशों के शव निस्तारण हेतु हडवाड भूमियों को चिन्हित कर गो समाधि स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। जनपद इटावा में गोआश्रय स्थल वेदपुरा में गोवंशों को पर्याप्त चारा न मिलने पर सीडीओ को सचेत किया गया है।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि गोआश्रय स्थलों के निरीक्षण के दौरान जो कमियां पाई गयी हैं उन्होंने त्वरित रूप से निस्तारित किया जाए। प्रदेश की सभी गौशालाओं में बर्मीकम्पोस्ट बनाया जाये। गोबर व गोमूत्र का संचय एवं उपयुक्त पंचगव्य उत्पाद जैस अगरबत्ती, धूपबत्ती, गोकास्ट, गोनाइन, गोअर्क, गोबर के दीये, कंडे, गमले एवं अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने में किये जाए ताकि गौशालाएं आत्मनिर्भर बने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो। महिला स्वयं सहायता समूहों को इससे विशेष रूप से जोड़ा जाए। गोकास्ठ दंडिका बनाने के लिए गोकास्ठ मशीन की व्यवस्था प्रत्येक गोशाला में की जाए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश मेश्राम ने मंत्री को गोशालाओं के निरीक्षण के दौरान प्राप्त कमियों के संबंध में अवगत कराते हुए आवश्यक सुझाव दिए और आश्वस्त किया कि गोशालाओं में यथाशीघ्र सभी कमियों को दूर कर दिया जायेगा। वर्ष पर्यन्त हरे चारे एवं भूसे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गौजन्य पदार्थों से निर्मित उत्पादों पर बल दिया जा रहा है। गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा लापरवाही या उदासीनता बरते जाने पर कठोर कार्यवाही की जायेगी।
बैठक में विशेष सचिव दुग्ध विकास डा0 राम सहाय यादव, निदेशक प्रशासन एवं विकास डा0 मेमपाल सिंह, निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डा0 राजेन्द्र प्रसाद, सीईओ यूपीएलएलडीडीवी डा0 पी0के0 सिंह, अपर निदेशक डा0 संगीता तथा संयुक्त निदेशक डा0 पी0के0 सिंह उपस्थित थे।

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