बच्चों में विकसित हुए अभिनय और अभिव्यक्ति कौशल
विवेक कुमार गुप्ता।
रायबरेली। भारतेंदु नाट्य अकादमी, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश शासन के स्वायत्त संस्थान के तत्वावधान में “शिक्षा में रंगमंच का महत्व” विषय पर 10 दिवसीय स्किल बेस्ड कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 20 जून 2026 से 29 जून 2026 तक मिहीलाल खेड़ा, बछरावां (रायबरेली) में बैक स्टेज सोशल एवं कल्चरल फाउंडेशन, लखनऊ द्वारा आयोजित की गई।
कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए रंगमंच को एक सशक्त माध्यम के रूप में प्रस्तुत करना था। इस दौरान प्रशिक्षकों अंशुमान दीक्षित, रूपल अग्रवाल और भूपेंद्र सिंह ने नन्हे-मुन्ने बच्चों को अभिनय के विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण के दौरान बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षक अंशुमान दीक्षित ने अभिनय के विभिन्न आयामों की जानकारी देते हुए बताया कि रंगमंच केवल मंचीय कला नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्पष्टता का भी माध्यम है।
कार्यशाला में भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रसिद्ध नाटक “अंधेर नगरी चौपट राजा” का अध्ययन भी कराया गया, साथ ही बच्चों से कविताओं का पाठ भी करवाया गया। इसके माध्यम से उन्हें साहित्य और रंगमंच की गहराई से परिचित कराया गया। आयोजकों ने बच्चों को यह भी बताया कि रंगमंच के माध्यम से वे अपने भविष्य को न केवल उज्ज्वल बना सकते हैं बल्कि रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यशाला के सफल संचालन में गांव के वरिष्ठजनों के साथ-साथ अमित शुक्ला (रिंकू) और कार्यशाला असिस्टेंट अमित गुप्ता का विशेष सहयोग रहा। अंत में सभी ने उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजन आगे भी नियमित रूप से होते रहेंगे, जिससे बच्चों में जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित हो सके।
