काव्य कला साधक ‘विभोर’ की स्मृति में कवियों का हुआ सम्मान
लखनऊ। काव्य कला संगम संस्था के तत्वावधान में आचार्य रामदेव लाल ‘विभोर’ की 90 वीं जयंती पर यूपी प्रेस क्लब में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. हरिशंकर मिश्रा थे।
प्रोफेसर हरि शंकर ने कहा कि विभोर जी का कृतित्व का महत्वपूर्ण वैशिष्ट्य है। उन्होंने प्रासंगिक विपुल साहित्य की सर्जना की और लक्षण ग्रंथ भी लिखें वस्तुत: वे आचार्य कवि की कोटि में आने वाले मनीषी हैं उनका व्यक्तित्व और कृतित्व प्रेरक और मार्गदर्शक है। समारोह के अध्यक्ष प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि आचार्य रामदेव लाल ‘विभोर’ काव्य शास्त्र के ज्ञाता और श्रेष्ठ कवि थे उन्होंने युवा पीढ़ी के कवियों हेतु’ छंद- विधान’, गजल ज्ञान और काव्या लोक जैसे मार्गदर्शन ग्रंथो की रचना की।
‘विभोर वाणी’ का हुआ लोकार्पण
संस्था के अध्यक्ष डॉ गोपाल कृष्ण शर्मा ने समारोह में आए हुए साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा की विभोर जी में कवि और आचार्य का दुर्लभ मणि- कांचन संयोग था। सम्मान समारोह में पत्रिका विभोर ‘वाणी’ का लोकार्पण एवं वरिष्ठ कवियों दयानंद जड़िया ,अशोक कुमार श्रीवास्तव,गौरी शंकर वैश्य, डॉक्टर दिनेश चंद्र अवस्थी ,डॉक्टर शिवमंगल सिंह एवं डॉ प्रेमलता त्रिपाठी को आचार्य रामदेव लाल ‘विभोर’ स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। कवियों को अंग वस्त्र और शील्ड देकर उनका सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन नवीन शुक्ला ‘नवीन’ ने किया। समारोह में विभोर जी के सुपुत्र संस्था के महामंत्री राजेश कुमार श्रीवास्तव एवं मुकेश कुमार श्रीवास्तव, बृजेश कुमार श्रीवास्तव अखिलेश कुमार श्रीवास्तव एवं विकास कुमार श्रीवास्तव सब परिवार उपस्थित रहे। और कार्यक्रम में बढ-चढ़कर सहयोग किया। सम्मान समारोह में लखनऊ नगर के साहित्यकार और अन्य लब्ध प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे।
