इसरो के वैज्ञानिकों सहित देश के प्रतिष्ठित खगोल वैज्ञानिक विद्यार्थियों से करेंगे संवाद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों और आमजन में वैज्ञानिक सोच एवं जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से 30 जून को विश्व क्षुद्रग्रह दिवस के अवसर पर एक दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, खगोल विज्ञान क्लबों के सदस्यों तथा अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले सभी नागरिकों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में सहभागिता पूर्णतः निःशुल्क होगी।
खगोल विज्ञान ऐसा विषय है जो केवल वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के समय में विद्यार्थियों और युवाओं के बीच एक लोकप्रिय रुचि का विषय भी बन चुका है। विशेष रूप से क्षुद्रग्रह (एस्ट्रॉयड) की खोज और अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति युवाओं का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। विश्व स्तर पर अनेक संस्थाएं क्षुद्रग्रह खोज अभियान संचालित करती हैं। अमेरिका की संस्था इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलैबोरेशन (IASC) भी ऐसे अभियानों का संचालन करती है, जिसके माध्यम से नागरिक वैज्ञानिकों (सिटीजन साइंटिस्ट) को वास्तविक एवं उच्च गुणवत्ता का खगोलीय डेटा उपलब्ध कराया जाता है। इन अभियानों से ऐसे अनेक क्षुद्रग्रहों की पहचान और अध्ययन संभव हो पाता है, जिनके बारे में अभी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
हमारे सौरमंडल में स्थित क्षुद्रग्रह बेल्ट के अलावा अपोलो और एटेन समूह के कई क्षुद्रग्रह पृथ्वी की कक्षा के निकट से गुजरते हैं। ऐसे नियर अर्थ ऑब्जेक्ट (Near Earth Objects) भविष्य में पृथ्वी के लिए संभावित खतरा बन सकते हैं। इन्हीं संभावित खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा प्रत्येक वर्ष 30 जून को विश्व क्षुद्रग्रह दिवस मनाया जाता है।
यह दिवस वर्ष 1908 में साइबेरिया के टूंगूस्का क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक क्षुद्रग्रहजनित वायुमंडलीय विस्फोट की स्मृति में मनाया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 50 मीटर व्यास का एक क्षुद्रग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 27 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से प्रवेश करते हुए पृथ्वी की सतह से लगभग 10 किलोमीटर ऊपर ही अत्यधिक ताप और दबाव के कारण विस्फोटित हो गया। इस घटना से लगभग 15 मेगाटन टीएनटी के बराबर ऊर्जा उत्पन्न हुई, जिससे लगभग 2,150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के करीब 8 करोड़ पेड़ नष्ट हो गए। यह घटना इस बात का महत्वपूर्ण उदाहरण है कि यदि कोई क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराए बिना भी वायुमंडल में विस्फोट करे, तो वह बड़े क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है।
कार्यक्रम में विश्व के विभिन्न एस्ट्रॉयड सर्च अभियानों में मेंटर की भूमिका निभाने वाले डॉ. अमृतांशु वाजपेयी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनके नाम पर 12 से अधिक प्रोविजनल एस्ट्रॉयड डिस्कवरी दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त इस्ट्रैक (इसरो) के वैज्ञानिक राजीव कुमार तथा लखनऊ के ख्यातिप्राप्त एस्ट्रोफिजिसिस्ट डॉ. शंकर दयाल पाठक भी प्रतिभागियों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण यह होगा कि राजीव कुमार प्रतिभागियों को अपने पास सुरक्षित वास्तविक क्षुद्रग्रह का एक टुकड़ा भी दिखाएंगे। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले सभी नागरिकों से इस निःशुल्क कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग करने की अपील की है।
