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यूपी रेरा की बड़ी बैठक: बैंकिंग रेगुलेशंस और प्रोजेक्ट अकाउंट नियमों में बदलाव पर जोर

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बैंकिंग रेगुलेशंस में बदलाव को लेकर बैंकर्स को किया गया जागरूक

लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर। गोमती नगर स्थित विभूति खंड के बैंक ऑफ बड़ौदा रिजनल ऑफिस में बुधवार को उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) द्वारा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट खातों के संचालन एवं बैंकिंग रेगुलेशंस में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य सभी नेशनलाइज्ड बैंकों एवं फाइनेंशियल संस्थानों को नए प्रावधानों और उनकी अनुपालन प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना था।

वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी

बैठक की अध्यक्षता यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने की। इस अवसर पर यूपी रेरा के सचिव महेंद्र वर्मा तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति उत्तर प्रदेश के अचल प्रमुख एवं संयोजक शैलेंद्र कुमार सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बैंकिंग एवं वित्तीय विशेषज्ञों ने लिया हिस्सा

बैठक में यूपी रेरा के प्रमुख सलाहकार अबरार अहमद, फाइनेंस कंट्रोलर प्रकाश सिंह, फाइनेंशियल एडवाइजर सुधांशु त्रिपाठी, सीए प्रवीण श्रीवास्तव, सीए अनुष्का तिवारी, सीए श्रेया गुप्ता, मीडिया कंसल्टेंट प्रांजल दीक्षित समेत विभिन्न बैंकों के रीजनल, जोनल मैनेजर एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। फाइनेंशियल एडवाइजर सुधांशु त्रिपाठी ने यूपी रेरा द्वारा 11 मई 2026 को जारी नए बैंकिंग रेगुलेशंस एवं प्रोजेक्ट अकाउंट दिशानिर्देशों की विस्तार से जानकारी दी।

तीन अलग-अलग खातों की व्यवस्था अनिवार्य

बैठक में बताया गया कि अब प्रत्येक रेरा पंजीकृत परियोजना के लिए प्रमोटर को तीन अलग-अलग बैंक खाते — कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट एवं ट्रांजैक्शन अकाउंट — खोलना अनिवार्य होगा। नए प्रावधानों के तहत खरीदारों से प्राप्त राशि का न्यूनतम 70 प्रतिशत भाग प्रतिदिन स्वतः सेपरेट अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा, जिसका उपयोग केवल भूमि एवं निर्माण कार्यों में ही किया जा सकेगा।

निकासी के लिए थ्री-सर्टिफिकेट सिस्टम लागू

इसके अलावा सेपरेट अकाउंट से किसी भी प्रकार की निकासी केवल आर्किटेक्ट, इंजीनियर एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी तीन अनिवार्य प्रमाणपत्रों के आधार पर ही संभव होगी। बैठक में बैंकों को निर्देशित किया गया कि वे परियोजना खातों पर किसी भी प्रकार का लियन, चेकबुक, डेबिट कार्ड या ट्रांजैक्शन आधारित नेट बैंकिंग सुविधा उपलब्ध न कराएं।

यूपी रेरा ने स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना के बैंक खातों में बदलाव की स्थिति में केवल “इन-प्रिंसिपल अप्रूवल” मिलने के बाद बैंक या प्रमोटर नए खातों का संचालन शुरू नहीं कर सकेंगे। नए खाते में संचालन केवल यूपी रेरा द्वारा “फाइनल अप्रूवल” दिए जाने के बाद ही अनुमन्य होगा। प्राधिकरण ने कहा कि यह व्यवस्था परियोजना निधियों की पारदर्शिता एवं अनधिकृत फंड ट्रांसफर रोकने के उद्देश्य से लागू की गई है।

सेपरेट एवं कलेक्शन अकाउंट पर लियन पूरी तरह प्रतिबंधित

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी बैंक, एनबीएफसी, निवेशक अथवा वित्तीय संस्था को परियोजना के सेपरेट अकाउंट एवं कलेक्शन अकाउंट पर किसी प्रकार का लियन लगाने की अनुमति नहीं होगी। यूपी रेरा के अनुसार इन खातों में जमा राशि केवल परियोजना विकास एवं होमबायर्स के हितों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित रखी जाएगी।

नए नियमों के तहत परियोजना के लिए एनबीएफसी से लिए गए ऋण पर ब्याज व्यय को अब एसबीआई की एमसीएलआर दर तक ही मान्य किया जाएगा। यूपी रेरा ने कहा कि इसका उद्देश्य अत्यधिक ब्याज व्यय दिखाकर परियोजना निधियों के दुरुपयोग को रोकना तथा वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है।

प्रोजेक्ट फाइनेंस की तिमाही जानकारी देना अनिवार्य

बैठक में यह भी बताया गया कि प्रमोटर्स को अब प्रत्येक तिमाही के अंत में परियोजना वित्त से संबंधित संपूर्ण विवरण शपथ पत्र के माध्यम से यूपी रेरा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसमें परियोजना ऋण, बैंक वित्त एवं अन्य फाइनेंसिंग स्रोतों की जानकारी शामिल होगी। इससे प्राधिकरण को परियोजनाओं की वित्तीय निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

यूपी रेरा ने बैंकों को निर्देशित किया कि जिन परियोजनाओं का पंजीकरण समाप्त हो चुका है अथवा निरस्त हो गया है, उनके कलेक्शन एवं सेपरेट अकाउंट पर किसी प्रकार का संचालन अनुमन्य नहीं होगा। ऐसे खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज किया जाएगा तथा केवल यूपी रेरा की अनुमति या परियोजना पंजीकरण विस्तार के बाद ही पुनः संचालन की अनुमति दी जाएगी।

अस्यूर्ड रिटर्न स्कीम पर सख्ती


बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि बिल्डरों द्वारा खरीदारों को दिए जाने वाले “अस्यूर्ड रिटर्न”, “गारंटीड रिटर्न” अथवा किसी अन्य प्रलोभनकारी निवेश प्रतिफल का भुगतान अब परियोजना में खरीदारों से प्राप्त धनराशि से नहीं किया जा सकेगा। यूपी रेरा ने स्पष्ट किया कि होमबायर्स से प्राप्त राशि केवल परियोजना विकास एवं निर्माण कार्यों में ही उपयोग की जाएगी। इस प्रावधान का उद्देश्य परियोजना धन के दुरुपयोग को रोकना एवं वास्तविक निर्माण कार्यों के लिए वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है।

अकाउंट क्लोजर के लिए नई एसओपी लागू
बैठक में परियोजना के सेपरेट अकाउंट को बंद करने की नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर भी विस्तार से चर्चा की गई। यूपी रेरा के अनुसार अब किसी भी परियोजना का सेपरेट अकाउंट केवल परियोजना पूर्ण होने के बाद और प्राधिकरण की पूर्व अनुमति मिलने पर ही बंद किया जा सकेगा। प्रमोटर को ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से यूपी रेरा से अनुमति प्राप्त करनी होगी। साथ ही यह प्रमाण भी देना होगा कि परियोजना के कॉमन एरिया को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) अथवा एसोसिएशन ऑफ अलॉटीज (AoA) को विधिवत हस्तांतरित कर दिया गया है। अनुमति मिलने के बाद ही बैंक शेष राशि की निकासी एवं खाते को बंद करने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

पारदर्शिता और होमबायर्स सुरक्षा पर जोर
यूपी रेरा चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और होमबायर्स के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना यूपी रेरा की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के धन का दुरुपयोग रोकने एवं समयबद्ध परियोजना पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए बैंकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

फंड ट्रांसफर एवं खाता संचालन पर सख्ती
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी बैंक यह सुनिश्चित करें कि परियोजना वित्त सीधे सेपरेट अकाउंट में ही जमा हो तथा किसी भी परिस्थिति में चौथे खाते के संचालन या नियमों के विपरीत फंड ट्रांसफर की अनुमति न दी जाए। साथ ही परियोजना खातों में बदलाव, खाता फ्रीज एवं डी-फ्रीज, तथा खातों के बंद किए जाने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

नए दिशानिर्देशों का उद्देश्य
अधिकारियों ने बताया कि नए दिशानिर्देशों का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन स्थापित करना, होमबायर्स का विश्वास मजबूत करना एवं परियोजनाओं में धन के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करना है।

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