श्वसन चिकित्सा में योगदान की सराहना
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त को हाल ही में हुयी ’प्लमोनरी कानक्लेव कारबेट-2026’ के दौरान उत्तराखण्ड के जिम कॉर्बेट, उत्तराखण्ड में आयोजित साइंटिफिक कॉन्फ्रेंस में ’’देवभूमि ओरेशन अवॉर्ड’’ से सम्मानित किया गया। डा. सूर्यकान्त द्वारा दिये गये ओरेशन का विषय ’पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन’ था। ज्ञात रहे कि पल्मोरी रिहैबिलिटेशन एक नई विधा है जिसमें सांस के रोगियों को उपचार के साथ फेफडे़ और शरीर को कैसे मजबूत बनाया जाये इसके लिए काफी उपयोगी होती है। उ0प्र0 के पहले पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केन्द्र की स्थापना रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग केजीएमयू में डा0 सूर्यकान्त द्वारा की गयी है, जिसमें पूर्णतः निःशुल्क सुविधा प्रदान की जाती है और अब तक 3000 से अधिक रोगियों को इसका लाभ मिल चुका है। साथ ही डा. सूर्यकान्त ने भारत में पहली बार इस कार्य से सम्बंधित एक राष्ट्रीय संगठन पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सोसाइटी की भी स्थापना की है, जिसके वे संस्थापक अध्यक्ष हैं।
डॉ. सूर्यकान्त ने सम्मान को KGMU की उपलब्धि बताया
डॉ. सूर्यकान्त को यह सम्मान रेस्पिरेटरी मेडिसिन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय एवं दीर्घकालिक योगदान, उत्कृष्ट चिकित्सकीय सेवाओं, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, उच्चस्तरीय शोध कार्य तथा प्रेरणादायी नेतृत्व के लिए प्रदान किया गया। उनके द्वारा प्रस्तुत देवभूमि ओरेशन को सम्मेलन की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों में शामिल किया गया, जिसने उपस्थित विशेषज्ञों को नवीन शोध, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा श्वसन रोगों के प्रभावी प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट एवं चिकित्सा विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। डा0 सूर्यकान्त का यह 22वां ओरेशन अवार्ड है इससे पूर्व में भी चिकित्सा जगत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए 21 ओरेशन प्राप्त हो चुके है।
इस अवसर पर डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि केजीएमयू एवं उनके विभाग के सामूहिक प्रयासों की पहचान है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे श्वसन रोगों की रोकथाम, आधुनिक उपचार, अनुसंधान तथा जनजागरूकता के क्षेत्र में समर्पित भाव से कार्य करते रहेंगे। विभाग के शिक्षकों, चिकित्सकों ने भी डॉ. सूर्यकान्त को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हार्दिक बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनकी उपलब्धियाँ संस्थान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाती रहेंगी।
डॉ. सूर्यकान्त विश्व के सर्वोच्च 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की श्रेणी में भी स्थान प्राप्त है। वह रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में विगत 30 वर्षों से चिकित्सा शिक्षक, 21 वर्षों से प्रोफेसर व 15 वर्षों से विभागाध्यक्ष के पद सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं एवं केजीएमयू की कार्य परिषद के सदस्य हैं।
