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सरकार ने 2025–26 के गेहूं उत्पादन को “मजबूत” बताया, मौसमीय चुनौतियों के बावजूद फसल स्थिर

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डेस्क। वर्ष 2025–26 के गेहूं उत्पादन को लेकर सामने आ रही विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा रबी सीजन को “मिश्रित लेकिन सुदृढ़” माना जा सकता है। जलवायु संबंधी प्रतिकूलताओं के बावजूद किसानों द्वारा अपनाए गए प्रभावी उपायों से फसल की समग्र स्थिति मजबूत बनी हुई है।
इस वर्ष देश में लगभग 33.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। समय पर और जल्दी बुवाई के कारण फसल को बेहतर बढ़त मिली और उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखी गई। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सीजन में गेहूं की फसल में किसी बड़े कीट या रोग का प्रकोप नहीं देखा गया, जिससे उपज पर नकारात्मक असर सीमित रहा।
हालांकि, फरवरी माह में असामान्य रूप से बढ़े तापमान ने फसल को प्रभावित किया। इससे दाने भरने की अवधि कम हुई और कुछ क्षेत्रों में उपज पर असर पड़ा। इसके अलावा, कटाई के समय कुछ इलाकों में असमय बारिश और ओलावृष्टि ने स्थानीय स्तर पर अनाज की गुणवत्ता और उत्पादन को नुकसान पहुंचाया।
इसके बावजूद, कई सकारात्मक कारकों ने स्थिति को संतुलित बनाए रखा है। जल्दी बुवाई, अतिरिक्त 0.6 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार और उच्च उपज देने वाली, जलवायु-लचीली किस्मों के बढ़ते उपयोग ने संभावित नुकसान की भरपाई में मदद की है। बढ़ी हुई किस्म प्रतिस्थापन दर (VRR) ने भी किसानों को बेहतर बीज अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
खरीद और मंडियों में आवक के आंकड़े भी मजबूत उत्पादन का संकेत दे रहे हैं। हरियाणा में गेहूं की आवक ने 75 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को पार कर लिया है, जिसमें से 56.13 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है—जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
मध्य प्रदेश में शुरुआती 78 लाख मीट्रिक टन के खरीद लक्ष्य को बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है, जिससे राज्य में बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, महाराष्ट्र में गेहूं उत्पादन 22.90 लाख टन रहने का अनुमान है और मराठवाड़ा व विदर्भ क्षेत्रों से आवक स्थिर बनी हुई है।
सरकार के अनुसार, मौसम की चुनौतियों के बावजूद बढ़े हुए रकबे, उन्नत कृषि पद्धतियों और बेहतर किस्मों के उपयोग के चलते वर्ष 2025–26 में देश का कुल गेहूं उत्पादन स्थिर रहने की संभावना है। यह परिदृश्य कृषि क्षेत्र में निरंतर सुधार और किसानों की अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।

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