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Jeetendra ने बेहतरीन डांस स्टाइल के दम पर हिंदी सिनेमा में बनाई अमिट पहचान

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डेस्क। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Jeetendra आज अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक समय ऐसा था जब उन्होंने लगातार सुपरहिट फिल्मों की झड़ी लगा दी थी। अपने खास डांस स्टाइल और ऊर्जा से भरपूर अभिनय के कारण उन्हें ‘जंपिंग जैक’ के नाम से जाना गया।

1964 में फिल्म गीत गाया पत्थरों ने से करियर की शुरुआत करने वाले जितेंद्र को 1967 की फिल्म फर्ज़ से बड़ी पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने 1960 के दशक के अंत से लेकर 1980 के दशक तक कई सफल फिल्मों में काम किया और इंडस्ट्री के शीर्ष अभिनेताओं में शामिल रहे। अपने लंबे करियर में उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। हिम्मतवाला, तोहफा, धरम वीर और जानी दुश्मन जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया। गंभीर और संवेदनशील भूमिकाओं में भी उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी।

1972-73 में लगातार फ्लॉप, परिचय से मिली सराहना

1970 के दशक की सफल शुरुआत के बावजूद Jeetendra को 1972 से 1973 के बीच करियर के एक मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। इस दौरान उनकी कई फिल्में जैसे एक हसीना दो दीवाने (1972), शादी के बाद (1972), यार मेरा (1972), रूप तेरा मस्ताना (1972), अनोखी अदा (1973) और गहरी चाल (1973) बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकीं। हालांकि इसी समय उन्हें भाई हो तो ऐसा (1972) और जैसे को तैसा (1973) जैसी फिल्मों से औसत सफलता भी मिली। इसके अलावा Gulzar की फिल्म परिचय (1972) में एक संवेदनशील ट्यूशन शिक्षक की भूमिका निभाकर उन्होंने आलोचकों की खूब सराहना हासिल की। फिल्म परिचय का गीत “मुसाफिर हूं यारों” भी बेहद लोकप्रिय हुआ और 1973 की बिनाका गीतमाला वार्षिक सूची में 25वें स्थान पर रहा। यह गीत आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा गीतों में गिना जाता है।

बिदाई से हिट सिलसिला, धर्मवीर बनी बड़ी ब्लॉकबस्टर

1974 में Jeetendra ने L. V. Prasad की फिल्म बिदाई में मुख्य भूमिका निभाई। Leena Chandavarkar और Durga Khote के साथ आई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और उनके खराब दौर का अंत कर दिया। यह उस साल की टॉप कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही। 1975 में उन्होंने Gulzar के साथ खुशबू में काम किया, जो Sarat Chandra Chattopadhyay के उपन्यास पंडितमशै पर आधारित थी और दर्शकों व समीक्षकों दोनों से सराहना मिली। इसके बाद सुनतान, उधार का सिंदूर और नागिन जैसी फिल्मों ने भी उन्हें व्यावसायिक सफलता दिलाई।

1977 उनके करियर का बेहद सफल साल रहा। Manmohan Desai की फिल्म धर्मवीर ने उन्हें एक बड़ी ब्लॉकबस्टर दी, जिसमें Dharmendra, Zeenat Aman और Neetu Singh भी थे। इसके बाद अपनापन सुपरहिट रही, जबकि किनारा में Hema Malini के साथ उनकी जोड़ी और गीत “नाम गुम जाएगा” खासा लोकप्रिय हुआ। 1978 में भी उनका सफलता का सिलसिला जारी रहा। स्वर्ग नरक सुपरहिट रही, जबकि कर्मयोगी, दिल और दीवार और जानी दुश्मन जैसी फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया। खानदान हिट रही, जबकि लोक परलोक औसत साबित हुई। इस तरह दशक के अंत तक जितेंद्र ने खुद को फिर से बॉलीवुड के शीर्ष सितारों में स्थापित कर लिया।

फिल्मों के अलावा, उन्होंने प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी कदम रखा और Balaji Motion Pictures की स्थापना की, जो आगे चलकर एक प्रमुख प्रोडक्शन हाउस बना। निजी जीवन की बात करें तो जितेंद्र ने Shobha Kapoor से शादी की। उनके दो बच्चे हैं—बेटी Ekta Kapoor, जो टेलीविजन इंडस्ट्री की जानी-मानी प्रोड्यूसर हैं, और बेटे Tusshar Kapoor, जो फिल्मों में सक्रिय हैं। बॉलीवुड में अपनी ऊर्जा, स्टाइल और शानदार अभिनय के दम पर जितेंद्र ने जो मुकाम हासिल किया, वह आज भी उन्हें हिंदी सिनेमा के महानतम सितारों में शामिल करता है।

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