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उन्नत कृषि की झलक के साथ किसानों के लिए तीन दिन का ज्ञान महाकुंभ 11 अप्रैल से

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डेस्क। रायसेन का “उन्नत कृषि महोत्सव 2026 – प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण” के माध्यम से किसानों को देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन मिलेगा, वहीं पराली को “कचरे से कंचन” (Waste to Wealth) बनाने की तकनीक और तीन दिन तक लगातार चलने वाली प्रशिक्षण‑श्रृंखला किसानों की खेती को नए पायदान पर ले जाएगी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रायसेन में दशहरा मैदान पर होने वाले इस महोत्सव के दौरान तीनों दिन चार स्थानों– सेमिनार हॉल‑1, सेमिनार हॉल‑2, सेमिनार हॉल‑3 और मुख्य हॉल में विषय‑आधारित सत्र होंगे, जिनमें फसल प्रबंधन से लेकर बाजार और आधुनिक तकनीक तक पूरी श्रृंखला को समेटा जाएगा।


“वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन, उन्नत कृषि की झलक– तीन दिन का ज्ञान महाकुंभ”


उन्होंने बताया कि पहले दिन 11 अप्रैल को दोपहर के सत्रों में फसल कटाई के बाद प्रबंधन और कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund – AIF) के उपयोग से उन्नत कृषि, डिजिटल कृषि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान, मधुमक्खी‑पालन से कृषि‑आय में वृद्धि और कृषि मशीनीकरण के माध्यम से खेती में उन्नति जैसे विषय शामिल रहेंगे। साथ ही, दलहन फसलों में उत्पादकता वृद्धि और क्षेत्र विस्तार, प्राकृतिक खेती, बागवानी फसलों का विस्तार तथा पराली प्रबंधन पर “वेस्ट‑टू‑वेल्थ (कचरे से कंचन)” के साथ नुक्कड़ नाटक के जरिए किसानों को व्यावहारिक संदेश दिए जाएंगे।
दूसरे दिन 12 अप्रैल को सुबह एफपीओ मीट (किसान उत्पादक संगठन सम्मेलन), मृदा स्वास्थ्य के माध्यम से हरित और सुरक्षित कृषि, संरक्षित खेती (पॉलीहाउस‑शेडनेट) को जलवायु‑अनुकूल कृषि के सतत दृष्टिकोण के रूप में और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) पर जागरूकता एवं संवाद कार्यशाला तथा नुक्कड़ नाटक के आयोजन होंगे। इसी दिन दोपहर से शाम तक एकीकृत कृषि प्रणाली, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, फूलों और सब्जियों की वैज्ञानिक खेती, एकीकृत कीट प्रबंधन– Integrated Pest Management (IPM) और बायो‑पेस्टीसाइड का उपयोग, नर्सरी प्रबंधन व गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उत्पादन, सूक्ष्म सिंचाई और फर्टिगेशन, हाइड्रोपोनिक्स, प्रिसिजन फार्मिंग और वर्टिकल फार्मिंग पर विशेष सत्र होंगे।
तीसरे दिन 13 अप्रैल को सुबह KVK (कृषि विज्ञान केंद्र) सम्मेलन, धान में आत्मनिर्भरता हेतु बीज प्रणाली, मत्स्यपालन और मोतीपालन, कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसी दिन दोपहर के सत्रों में मध्य प्रदेश की जलवायु आधारित डेयरी संवर्धन एवं पशुपालन, धान की सीधी बुआई, मुर्गीपालन‑बकरीपालन से आय‑वृद्धि और “धरती बचाओ” विषय पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जलवायु‑संतुलित एवं टिकाऊ खेती का संदेश दिया जाएगा।

“पराली से ‘कचरे से कंचन’ तक – वेस्ट‑टू‑वेल्थ की वैज्ञानिक राह”

शिवराज सिंह ने बताया कि महोत्सव में पराली प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाएगा, जहाँ “कचरे से कंचन” की अवधारणा के तहत वेस्ट‑टू‑वेल्थ मॉडल किसानों के समक्ष रखे जाएंगे ताकि पराली और कृषि‑अपशिष्ट को जलाने की जगह खाद, ऊर्जा और अतिरिक्त आय के स्रोत में बदला जा सके। पराली प्रबंधन पर सत्र के साथ‑साथ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिलने वाले आर्थिक लाभ को सरल और सहज रूप में समझाया जाएगा। कृषि मंत्रालय और ICAR द्वारा पराली प्रबंधन, फसल बीमा, सुरक्षित कीटनाशक उपयोग, प्राकृतिक खेती और “धरती बचाओ” पर आधारित नुक्कड़ नाटकों की स्क्रिप्ट संस्कृति विभाग को दी गई है, जो मेले के दौरान अलग‑अलग स्थानों पर नाट्य‑प्रस्तुतियों के रूप में किसानों तक पहुँचेगी। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य तकनीकी संदेशों को किसानों की रोजमर्रा की भाषा में बदलकर व्यवहार में स्थायी परिवर्तन की दिशा में प्रेरित करना है।

“ICAR के मृदा परीक्षण, ड्रोन, हाइड्रोपोनिक्स और समेकित कृषि प्रणाली के लाइव मॉडल”

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के अनुसार, मेले के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद “वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन, उन्नत कृषि की झलक” को धरातल पर उतारेगी; किसानों द्वारा लाए गए मिट्टी के नमूनों का परीक्षण कर मृदा स्वास्थ्य रिपोर्ट दी जाएगी, जिससे खेत‑स्तर पर सही फसल और पोषक तत्व प्रबंधन की योजना बन सके। साथ ही ग्राफ्टिंग, उन्नत नर्सरी प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स, हाई‑टेक हॉर्टिकल्चर और समेकित कृषि प्रणाली के लाइव मॉडल प्रदर्शित होंगे ताकि किसान इन तकनीकों को देखकर‑समझकर अपनी खेती में लागू कर सकें। ड्रोन तकनीक और नैनो‑उर्वरक छिड़काव का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिससे सटीक और कम लागत वाले उर्वरक प्रबंधन की संभावनाएँ किसानों के सामने प्रत्यक्ष रूप से आएंगी। विभिन्न राज्यों के प्रगतिशील किसानों और वैज्ञानिकों के अनुभव‑साझा सत्रों में सफल प्रयोग, नवाचार और बाज़ार से जुड़ाव के व्यावहारिक उदाहरण रखे जाएंगे ताकि किसान प्रेरित होकर अपनी खेती में बदलाव की नई शुरुआत कर सकें।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह तीन दिन का वृहद कार्यक्रम वास्तव में किसानों की ज़िंदगी बदलने की अवधारणा को साकार करेगा और किसानों की तकदीर बदलने का सबसे बड़ा मौका साबित होगा। उन्होंने किसानों से इस आयोजन में ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है।

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