पुरावशेषों से लेकर दुर्लभ सिक्कों तक, संग्रहालय में इतिहास से रूबरू हुई नई पीढ़ी
लखनऊ। नई पीढ़ी को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और कला से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की पहल को उत्साहजनक सफलता मिल रही है। वर्षभर चलने वाले विशेष निःशुल्क शैक्षिक भ्रमण अभियान के पहले ही सप्ताह में लगभग 15 हजार छात्र-छात्राओं और उनके गुरुजनों ने राज्य संग्रहालय, लखनऊ का भ्रमण किया। इस पहल ने राज्य संग्रहालय को जेन-जी और जेन-एल्फा के लिए अनुभव आधारित शिक्षा, संवाद और जिज्ञासा का जीवंत केंद्र बना दिया है। इसी क्रम में शनिवार को अकेले बाराबंकी जिले के लगभग 4300 विद्यार्थियों ने संग्रहालय भ्रमण कर इतिहास और संस्कृति को करीब से जाना।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग और राज्य संग्रहालय, लखनऊ के प्रयासों से 12 से 19 सितंबर 2026 तक लखनऊ मंडल के लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, रायबरेली और बाराबंकी जिलों के विद्यार्थियों ने संग्रहालयों का निःशुल्क शैक्षिक भ्रमण किया। इस दौरान लखनऊ के 2, उन्नाव के 3, सीतापुर के 7, रायबरेली के 4 और बाराबंकी के 7 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
संग्रहालय में छात्रों ने जानी इतिहास की विरासत
कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों ने संग्रहालय में संरक्षित प्रागैतिहासिक और पुरातात्विक अवशेषों, प्राचीन मूर्तियों, दुर्लभ सिक्कों, चित्रों, अस्त्र-शस्त्रों, लोककला, सज्जा कला और प्राकृतिक इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण संग्रहों का अवलोकन किया। संग्रहालय परिसर की विभिन्न दीर्घाओं में विद्यार्थियों ने इतिहास, कला, संस्कृति और प्रकृति से जुड़े विषयों को प्रत्यक्ष रूप से समझा और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

गाइडेड टूर के माध्यम से संग्रहालय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को प्रमुख कलाकृतियों, ऐतिहासिक अवशेषों और सांस्कृतिक धरोहरों के महत्व की जानकारी दी। विद्यार्थियों ने भारतीय सभ्यता के विकासक्रम, प्राचीन कला परंपराओं, विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों, स्वतंत्रता आंदोलन और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के बारे में उत्साहपूर्वक जानकारी प्राप्त की। अनेक विद्यार्थियों के लिए यह पहला संग्रहालय भ्रमण था, जिससे उनमें इतिहास और विरासत के प्रति विशेष रुचि और जिज्ञासा देखने को मिली।
संग्रहालयों से जुड़ेंगे यूपी के विद्यार्थी
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध प्रदेश है और नई पीढ़ी को इस गौरवशाली विरासत से परिचित कराना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने बताया विद्यार्थियों को संग्रहालयों से जोड़ने का यह अभियान उनमें अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं के प्रति गर्व का भाव विकसित करेगा। प्रदेश के संग्रहालयों को विद्यार्थियों के लिए आकर्षक, ज्ञानवर्धक और जीवंत अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है।
अपर मुख्य सचिव, संस्कृति,पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि संग्रहालयों को बच्चों और युवाओं के लिए अधिक संवादपरक और अनुभव आधारित शिक्षण केंद्र बनाया जाना आवश्यक है। यह पहल विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त ज्ञान को वास्तविक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक साक्ष्यों के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अभियान वर्षभर चरणबद्ध तरीके से चलता रहेगा, ताकि प्रदेश के अधिकाधिक विद्यार्थी संग्रहालयों से जुड़ सकें।

राज्य संग्रहालय, लखनऊ के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने कहा कि संग्रहालय केवल पुरावशेषों के संरक्षण का स्थान नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक जागरूकता का सशक्त माध्यम भी हैं। उन्होंने बताया कि वर्षभर चलने वाले इस अभियान के तहत आगे भी प्रदेश के विभिन्न जनपदों के पी.एम. श्री विद्यालयों, राजकीय विद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को संग्रहालयों से जोड़ा जाएगा। साथ ही गाइडेड भ्रमण, विशेष प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं, व्याख्यान और जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी निरंतर जारी रहेगा।
