- लखनऊ में ‘विश्व धरोहर दिवस’ पर खास आयोजन, युवाओं ने संभाली संस्कृति की कमान
- 267 छात्रों ने रंगों और ज्ञान से जीवंत की भारतीय संस्कृति, विरासत के प्रति जागरूक हुई युवा पीढ़ी
- संस्कृति से जुड़ेगा हर वर्ग, तभी बढ़ेगी जागरूकता : जयवीर सिंह
लखनऊ। ‘विश्व धरोहर दिवस’ के मौके पर राजधानी लखनऊ में शनिवार को विरासत और संस्कृति को समर्पित एक प्रेरणादायक आयोजन किया गया, जिसने लोगों को अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के महत्व को समझने और उन्हें सहेजने का संदेश दिया। राज्य संग्रहालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में ‘हमारी धरोहरें, हमारा गौरव’ विषय के जरिए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक और प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया गया।
इस कार्यक्रम के तहत संग्रहालय परिसर में एक भव्य प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें भारत की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों और स्मारकों के छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी में अजंता-एलोरा की गुफाओं, आगरा के किले और ताजमहल से लेकर हाल ही में विश्व धरोहर सूची में शामिल असम के चराईदेव स्थित अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली तक की झलक देखने को मिली। और बड़ी संख्या में दर्शकों ने इसका अवलोकन किया।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, इस मौके पर छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के सैकड़ों प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों ने अपनी रचनात्मकता और ज्ञान का प्रदर्शन करते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत को रंगों और विचारों के माध्यम से जीवंत कर दिया। विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. संजय कुमार बिस्वाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सांस्कृतिक धरोहरें किसी भी राष्ट्र की पहचान होती हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं का अपनी विरासत से जुड़ना न केवल गर्व की बात है, बल्कि भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। उन्होंने संग्रहालय की इस पहल की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इसके अलावा राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने कहा कि विश्व धरोहरें हमारी साझा संस्कृति और इतिहास की अमूल्य पहचान हैं। उन्होंने सभी को इन धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और आने वाली पीढ़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित रखने का आह्वान किया। उनके अनुसार, यह केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, ‘विश्व धरोहर दिवस’ के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि हमारी सांस्कृतिक विरासत ही हमारी असली पहचान है। ऐसे प्रयास न केवल लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं, बल्कि एक जागरूक और जिम्मेदार समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
