पंडित सुनील पांडेय।
लखनऊ। आज वैशाख मास की अमावस्या तिथि पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है, जिसे सतुवाई अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व होता है, लेकिन वैशाख अमावस्या को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्य, दान-पुण्य और पितृ तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है।
तिथि और मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार, वैशाख अमावस्या की तिथि 16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को रात 08:11 बजे प्रारंभ हो चुकी है और 17 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को शाम 05:21 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, अमावस्या का मुख्य पर्व 17 अप्रैल को ही मनाया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की रात जितनी प्रभावशाली होती है, उतनी ही संवेदनशील भी मानी जाती है। इसलिए इस दिन विशेष सावधानी और सात्विकता का पालन करना आवश्यक होता है। श्रद्धालु प्रातःकाल पवित्र नदियों में स्नान कर अपने दिन की शुरुआत करते हैं और इसके बाद पितरों का तर्पण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। वैशाख अमावस्या पर दान का भी विशेष महत्व है। सनातन परंपरा में दान को सर्वोच्च पुण्य कर्मों में स्थान दिया गया है। इस दिन अन्न दान और जल दान करने से तीर्थ यात्रा के समान फल प्राप्त होता है। राहगीरों के लिए प्याऊ की व्यवस्था करना, जरूरतमंदों को भोजन कराना और गरीबों की सहायता करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। मनुस्मृति में दान का उल्लेख करते हुए कहा गया है।
तपः परं कृतयुगे त्रेतायां ज्ञानमुच्यते।
द्वापरे यज्ञमेवाहुर्दानमेकं कलौ युगे॥
अर्थात् सतयुग में तप, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ और कलियुग में दान ही मनुष्य के कल्याण का सबसे बड़ा साधन है।
विशेष रूप से चावल, चीनी, दूध, दही और शीतल खाद्य पदार्थों का दान करना शुभ माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इन वस्तुओं के दान से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है, जिससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही जीवन में सुख, समृद्धि और संतुलन बना रहता है।
धर्मग्रंथों में भी दान के महत्व का उल्लेख मिलता है। मनुस्मृति के अनुसार, सतयुग में तप, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ और कलियुग में दान को ही मनुष्य के कल्याण का सर्वोत्तम साधन बताया गया है। यही कारण है कि आज के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व और बढ़ जाता है। इस प्रकार, वैशाख अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सेवा और आध्यात्मिक उन्नति का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसे श्रद्धा और नियमों के साथ मनाना ही इसका सच्चा फल प्रदान करता है।
