2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को साकार करने में उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गौतम बुद्ध नगर में आयोजित यू.पी. इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के खाद्य प्रसंस्करण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और इसी उद्देश्य से खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 लागू की गई है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि एवं बागवानी उत्पादों की प्रचुरता है। आवश्यकता इस बात की है कि किसानों को केवल कच्चे उत्पाद के विक्रेता के रूप में न देखा जाए, बल्कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक उन्हें पूरी मूल्य श्रृंखला से जोड़ा जाए। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने गौतम बुद्ध नगर क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से गाजर उत्पादन एवं उसके विपणन का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि अलग-अलग जिलों में इसी प्रकार के उत्पाद-विशेष क्लस्टर विकसित किए जाएं तो कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों की देश की विभिन्न मंडियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग बढ़ाई जा सकती है। इससे कृषि उपज की बर्बादी को कम करने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के उद्यमी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। शहद उत्पादन एवं मधुमक्खी पालन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता वाला हो तो यूरोप, अमेरिका और कनाडा जैसे बाजारों में भी उसकी मांग बनाई जा सकती है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए उद्यम स्थापित करने के लिए आगे आएं।
उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश करने के इच्छुक उद्यमियों के लिए प्रदेश सरकार की नीति में विभिन्न प्रकार की सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध हैं। यदि कोई उद्यमी खाद्य प्रसंस्करण इकाई में बिजली की आवश्यकता को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करता है तो पुरुष उद्यमियों को सोलर ऊर्जा के लिए 50 प्रतिशत तथा महिला उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। उन्होंने उद्यमियों से अपील की कि वे प्रदेश सरकार की नीतियों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाएं।
यूपी में गांव स्तर तक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां लगाने पर जोर
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन के माध्यम से संभावित उद्यमियों की पहचान करने और उन्हें उद्यम स्थापित करने में सहयोग देने का कार्य किया जा रहा है। बैंकों के साथ भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि उद्यमियों को अनावश्यक रूप से बैंक के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें योजनाओं का लाभ समय से मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान को उद्यमी अपना अधिकार समझें, लेकिन यह अधिकार वास्तविक रूप से तभी सार्थक होगा, जब उद्यमी स्वयं भी अपनी इकाई स्थापित करने और उसे सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे आएं। सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल अनुदान देना नहीं, बल्कि टिकाऊ और रोजगारपरक उद्यम खड़े करना है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक समय औद्योगिक विकास के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों का उदाहरण दिया जाता था, लेकिन आज उद्यमियों और निवेशकों के सहयोग से उत्तर प्रदेश भी देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश गंतव्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि यह अभी शुरुआत है; वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को साकार करने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश के प्रत्येक ग्राम सभा स्तर तक विभिन्न प्रकार की स्थानीय इकाइयों और उद्यमों को स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होने से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
UPITS 2026: यूपी के उत्पादों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने पर जोर
उप मुख्यमंत्री ने यू.पी. इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विदेशी निवेश और विदेशी उत्पादों का विरोधी नहीं है, लेकिन प्रदेश की प्राथमिकता यह है कि विदेशी कंपनियां भारत और उत्तर प्रदेश में निवेश करें, यहां उत्पादन करें और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बन रहे गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए सरकार उद्यमियों के साथ खड़ी है।
उन्होंने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे खाद्य प्रसंस्करण सहित विभिन्न क्षेत्रों में नई तकनीक, बेहतर गुणवत्ता, आधुनिक पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाते हुए आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि उद्यमियों की ऊर्जा, नवाचार और सरकार की नीतियों का समन्वय उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उप मुख्यमंत्री ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो- 2026 के अंतर्गत Presentation on ‘Food Processing Policy- 2023’ के कार्यक्रम में स्टालों का निरीक्षण किया। इस दौरान खाद्य प्रसंस्करण के लाभार्थियों को डेमो चेक व स्वयं सहायता समूह की बहनों को प्रशस्ति पत्र आदि वितरित किए।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कुमार कश्यप,राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी एल मीणा, विशेष सचिव राजकमल यादव, उप निदेशक एम पी सिंह, खाद्य प्रसंस्करण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, उद्यमियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
