25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक बच्चों को POCSO कानून और बाल अधिकारों की जानकारी दी गई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा ‘यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012’ (पॉक्सो अधिनियम) के संबंध में विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए 25 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2026 तक प्रदेशव्यापी विशेष जागरूकता अभियान संचालित किया गया। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को अभियान का समापन हुआ।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व तथा न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, वरिष्ठ न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में यह अभियान संचालित किया गया।
3,643 स्कूलों में 6.46 लाख विद्यार्थियों को किया जागरूक
सदस्य सचिव डॉ. मनु कालिया ने बताया कि अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने प्रदेश के 3,643 विद्यालयों का भ्रमण कर लगभग 6,46,100 से अधिक विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के मार्गदर्शन में प्रत्येक जनपद के न्यायिक अधिकारियों ने शहरी, ग्रामीण एवं दूर-दराज क्षेत्रों के विद्यालयों में विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी।

विद्यालयों में प्रातःकालीन प्रार्थना सभाओं के दौरान विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, शरीर की निजता, गुड टच एवं बैड टच, शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के संबंध में जागरूक किया गया। विद्यार्थियों को उपलब्ध कानूनी उपायों, चाइल्ड प्रोटेक्शन हेल्पलाइन तथा विधिक सहायता सेवाओं की जानकारी भी दी गई।
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय से एक अध्यापक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। नोडल अधिकारी बाल सुरक्षा एवं पॉक्सो अधिनियम से संबंधित विधिक जागरूकता को निरंतर विद्यार्थियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बच्चों को कानूनी अधिकारों और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
अभियान के दौरान विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद को विशेष महत्व दिया गया। पारस्परिक संवाद सत्र, जागरूकता चर्चाओं, प्रतियोगिताओं, नुक्कड़ नाटकों, रैलियों एवं अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को कानूनी प्रावधानों को सरल एवं सहज तरीके से समझाया गया। साथ ही नाबालिगों से जुड़े विषयों के संबंध में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने और विधिक जानकारी के अभाव में उत्पन्न होने वाले संभावित परिणामों के प्रति किशोरों को जागरूक किया गया।

अभियान का प्रमुख संदेश रहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षा, गरिमा और संरक्षण का अधिकार है तथा जागरूकता शोषण एवं दुर्व्यवहार के विरुद्ध सुरक्षा का पहला कदम है। विद्यालयों तक सीधे विधिक जागरूकता पहुंचाने से न्याय व्यवस्था और युवा नागरिकों के बीच संवाद को और मजबूत करने का अवसर मिला।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बालकों पर केंद्रित विधिक साक्षरता कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने तथा बाल अधिकारों, कानूनी सहायता और न्याय तक पहुंच के संबंध में जागरूकता को और सुदृढ़ करने पर बल दिया जा रहा है। गांधी जयंती के अवसर पर बच्चों को कम उम्र से ही व्यक्तिगत सुरक्षा, सम्मान एवं बाल अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए इसी प्रकार के निरंतर प्रयास किए जाने का संकल्प भी लिया गया।
