किसानों से संतुलित मात्रा में उर्वरक क्रय करने और पहले से अधिक भंडारण न करने की अपील
लखनऊ। प्रदेश सरकार किसानों को उनकी आवश्यकता अनुसार रासायनिक उर्वरकों को उपलब्ध कराने हेतु पूरी तरह से कटिबद्ध और दृढ़ संकल्पित है। इसी के दृष्टिगत कृषि विभाग द्वारा राज्य के किसानों के लिये अनुदान पर सभी प्रकार के उर्वरकों को पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कृषि विभाग द्वारा किसानों की आवश्यकता अनुसार रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार के सक्रिय सहयोग से प्रचुर मात्रा में उर्वरकों की अनवरत उपलब्धता सुनिश्चित करायी जा रही है।
वर्तमान में प्रदेश में 13.28 लाख मी०टन यूरिया, 05.23 लाख मी०टन डी०ए०पी०, 04.81 लाख मी०टन एन०पी०के०, 03.69 लाख मी०टन एस०एस०पी० एवं 0.93 लाख मी०टन एम०ओ०पी० को मिलाकर कुल 27.94 लाख मी०टन उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है, जो कि गत वर्ष की तुलना में 3.13 लाख मी०टन अधिक है। आगामी खरीफ फसलों की माँग के अनुसार भारत सरकार द्वारा लगातार आवंटन करते हुए उर्वरकों की निरन्तर आपूर्ति की जा रही है।
कतिपय अराजक तत्वों द्वारा अनुदानित उर्वरक का प्रयोग, कृषि के अतिरिक्त अन्य व्यावसायिक कार्यों में किया जाता है, जबकि अनुदानित उर्वरक, किसानों के लिये खेती में प्रयोग हेतु अनुदानित दर पर बाजार में उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रकार अनुदान का लाभ, जो किसानों को मिलना चाहिए उसके दुरुपयोग होने की सम्भावना रहती है। अनुदानित उर्वरक का दुरुपयोग रोकने के लिये शासन द्वारा यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि उर्वरकों का विक्रय किसान पहचान पत्र (फार्मर आई०डी०) उपलब्ध कराने वाले कृषकों को उनकी जोत सम्बन्धी अभिलेखों के आधार पर ही किया जाय। कृषि विभाग द्वारा अनुदानित उर्वरकों यथा यूरिया, डी०ए०पी०, एन०पी०के०, एम०ओ०पी० एवं एस०एस०पी० के साथ किसी अन्य निवेश की टैगिंग को पूर्णतया प्रतिबंधित किया गया है।
कृषि विभाग द्वारा किसानों से यह विशेष अपील की गई है कि उर्वरकों का सुगमतापूर्वक क्रय करने के लिये फार्मर आई०डी० के साथ विक्रय केन्द्रों पर पहुँच कर अपनी बोई गई फसल के लिये कृषि वैज्ञानिकों द्वारा संस्तुत उर्वरकों की मात्रा के अनुसार संतुलित मात्रा में प्रयोग करें। कृषि भूमि/खतौनी के आधार पर फसल की अवस्था एवं आवश्यकता के अनुसार अधिकतम डी०ए०पी० 5 बोरी तथा यूरिया 7 बोरी प्रति हेक्टेयर की मात्रा का ही क्रय किया जाये। इसके साथ ही प्रदेश में प्रचुर मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता के दृष्टिगत किसानों हेतु सलाह है कि वह उर्वरकों का अत्यधिक क्रय एवं उनके अनावश्यक प्रयोग से बचें। उर्वरक का प्रयोग करने के समय से पूर्व उर्वरकों की अत्यधिक खरीद तथा भण्डारण नहीं करें, क्योंकि हवा व नमी आदि के सम्पर्क में आने पर उर्वरक की क्षमता में क्षरण होने लगता है। इसलिये किसान अपनी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक का क्रय करें।
प्रदेश के समस्त जिलों में निगरानी समितियों का गठन कर रासायनिक उर्वरकों की बिक्री पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उर्वरकों के अवैध भण्डारण, कालाबाजारी आदि के सम्बन्ध में छापेमारी सहित आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही भी निरंतर सुनिश्चित करायी जा रही है।
