धरती पर प्रीत लिखने का संदेश देती भावपूर्ण हिंदी कविता
वीरेंद्र कुमार मिश्र ‘विरही’
सराबोर कर देंगे जग को, हम धरती पर प्रीत लिखेंगे।
कहीं न कोई जगह बचेगी, हम पत्थर पर गीत लिखेंगे।
नफरत का बाजार गर्म है, बढ़ी चली जाती है खेती।
उर्वर धरा प्रेम का घटता, बढ़ती गई घृणा की रेती।
नेह-नीर सूखे जिस दिल के, हम उसपर मनमीत लिखेंगे।……
चारों तरफ द्वेष की आंधी, कटुता का तूफान चला है।
भीतर का इंसान मर रहा, हर दिल में शैतान पला है।
दानवता पर मानवता की हम वह प्यारी जीत लिखेंगे।…….
राम-सिया का फुलवारी में, कुंज,राधिका- श्याम लिखेंगे।
नल-दमयंती हीर और रांझा, भक्त प्रेम हनुमान लिखेंगे।
जिनने धरा प्रेम से सींची, वही प्रीत की रीत लिखेंगे।…….
सर्व धर्म समभाव मनोहर, हर मन पर उल्लास लिखेंगे।
सूर,जायसी,मीरा, वर्मा,तुलसी का अनुप्रास लिखेंगे।
नेहनीर से धोकर ‘विरही’, हर दिल पर हम मीत लिखेंगे।…….
महावीर गाँधी गौतम का, भक्त सूतीच्छन प्रेम लिखेंगे।
ध्रुव,प्रह्लाद,गुहा,केवट का, मां शबरी का नेम लिखेंगे।
जिससे हो कल्याण धरा का, हम मानव का हेतु लिखेंगे।…….

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