- एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर जारी किया गया विज्ञापन
- काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर में पंजीकृत आर्किटेक्ट कर सकेंगे आवेदन
लखनऊ। लखनऊ में भवन मानचित्र बनवाने के लिए अब लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा। इसके लिए एलडीए योग्य आर्किटेक्ट्स का पैनल तैयार करेगा, जो अधिक सरल और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत मानचित्र पास कराने में अहम भूमिका निभाएंगे। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर आर्किटेक्ट्स के इम्पैनलमेंट के लिए विज्ञापन जारी कर दिया गया है।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि शहर में आवासीय एवं व्यावसायिक भवन बनाने के लिए नागरिकों को प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराना होता है। इसके लिए लोगों को निजी स्तर पर आर्किटेक्ट ढूंढने पड़ते थे, जिसमें कई बार बिचौलिये सामने आ जाते थे। इससे लोगों को अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ती थी और धोखाधड़ी की आशंका भी बनी रहती थी। इसके अलावा कई मामलों में आर्किटेक्ट के अधीनस्थों द्वारा मानचित्र सबमिट किए जाते थे, जिनमें तकनीकी खामियों के कारण आवेदन निरस्त हो जाते थे। इससे मानचित्र स्वीकृति में अनावश्यक विलंब होता था और लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
बिचौलियों की भमिका होगी खत्म
उपाध्यक्ष ने बताया कि नयी व्यवस्था के तहत लोगों को भवन मानचित्र बनवाने के लिए आर्किटेक्ट की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा। एलडीए द्वारा पैनल में शामिल किए गए योग्य आर्किटेक्ट्स की सूची उपलब्ध करायी जाएगी, जिससे लोगों को सीधे प्रमाणित और विश्वसनीय सेवाएं मिल सकेंगी। इससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और मानचित्र के लिए अतिरिक्त भुगतान तथा धोखाधड़ी की संभावनाओं पर भी रोक लगेगी।
पंजीकृत आर्किटेक्ट कर सकेंगे आवेदन
मुख्य नगर नियोजक के0के0 गौतम ने बताया कि काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर में पंजीकृत आर्किटेक्ट ही पैनल में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकेंगे। चयनित आर्किटेक्ट्स को उपलब्धता के आधार पर प्राधिकरण कार्यालय में वर्क स्पेस भी उपलब्ध कराया जाएगा। आर्किटेक्ट्स के लिए 75 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से फीस निर्धारित की गई है। इसके अतिरिकत बेहतर प्रदर्शन करने वाले आर्किटेक्ट्स को प्राधिकरण के स्तर से 50,000 रुपये तक का तिमाही इंसेंटिव भी दिया जाएगा।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि नयी व्यवस्था के तहत केवल अधिकृत एवं जिम्मेदार आर्किटेक्ट्स ही प्रक्रिया में शामिल होंगे। इससे आवेदन की गुणवत्ता बेहतर होगी और मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया तेज, सुगम और पारदर्शी बनेगी।
