60 संकाय सदस्यों ने लिया हिस्सा
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से 9वें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्मृति व्याख्यान एवं फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन केजीएमयू की कुलपति एवं पद्मश्री सम्मान (2025) से सम्मानित प्रो. सोनिया नित्यानंद के संरक्षण में हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षकों में नेतृत्व क्षमता और आत्म-जागरूकता विकसित करने के साथ शिक्षण एवं अधिगम की प्रभावी प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करना था। इसके माध्यम से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार तथा शिक्षकों के व्यावसायिक कौशल को विकसित करने पर जोर दिया गया।
केजीएमयू की कार्यशाला में 60 चिकित्सा शिक्षकों ने सीखे नेतृत्व और संघर्ष प्रबंधन के गुर
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो. सुचेता पी. डांडेकर रहीं। वह एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, लखनऊ के जैव रसायन एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में प्रोफेसर हैं। इसके साथ ही वह मणिपाल एकेडमी ऑफ हेल्थ एजुकेशन में एडजंक्ट फैकल्टी के रूप में भी जुड़ी हुई हैं। प्रो. डांडेकर सेठ जी.एस. मेडिकल कॉलेज एवं केईएम अस्पताल, मुंबई के जैव रसायन विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रो. डांडेकर ने “Know Yourself, Lead Others, Navigate Conflict” विषय पर कार्यशाला का संचालन किया। इसमें 60 संकाय सदस्यों ने सहभागिता की। संवादात्मक चर्चाओं एवं समूह गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने नेतृत्व, आत्म-जागरूकता तथा कार्यस्थल पर संघर्ष प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
चिकित्सा शिक्षा की प्रचलित मान्यताओं की समीक्षा, शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पर दिया जोर
अपराह्न सत्र में ब्राउन हॉल, केजीएमयू में आयोजित 9वें डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम स्मृति व्याख्यान में प्रो. डांडेकर ने “From Mantras to Meaning: Revisiting Common Beliefs in Health Professions Education” अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में प्रचलित मान्यताओं की आलोचनात्मक समीक्षा तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, सार्थक और शिक्षार्थी केंद्रित बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रो. सोनिया नित्यानंद के नेतृत्व एवं संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम ने गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, संकाय विकास और नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों के प्रति केजीएमयू की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। कार्यक्रम का समन्वय प्रो. अमिता पांडेय, विभागाध्यक्ष, चिकित्सा शिक्षा विभाग, प्रो. सारिका गुप्ता एवं प्रो. रिदम द्वारा किया गया।
