इस समारोह की अध्यक्षता करेंगे वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन
डेस्क। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), कोच्चि द्वारा निर्मित तीसरा पनडुब्बी रोधी युद्धपोत शैलो वॉटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) ‘मंगरोल’ 12 अक्टूबर 2026 को नौसेना डॉकयार्ड, मुंबई में भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। इस समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन करेंगे। इस अवसर पर नौसेना और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा मंत्रालय एवं कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक तथा स्वदेशी हथियारों और सेंसर निर्माताओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
80% से अधिक स्वदेशी तकनीक से बना INS मंगरोल, आधुनिक सोनार और टॉरपीडो सिस्टम से लैस; तटीय सुरक्षा में निभाएगा अहम भूमिका
गुजरात के जूनागढ़ जिले के एक तटीय शहर और प्रमुख मछली पकड़ने के बंदरगाह ‘मंगरोल’ के नाम पर नामांकित यह पोत, पूर्ववर्ती आईएनएस मंगरोल (एम 85) की विरासत को आगे बढ़ाता है, जो एक सुरंगरोधी पोत था और जिसने 07 अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं दी थीं। इस पोत का नामकरण अपने पूर्व युद्धपोतों की विरासत को संजोकर रखने की नौसेना की परंपरा को बनाए रखता है।
80% से ज़्यादा स्वदेशी सामग्री से बना ‘मंगरोल’ युद्धपोत के डिज़ाइन, निर्माण और उन्नत हथियारों व सेंसर को जोड़ने के मामले में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दिखाता है। भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा बनाया गया यह जहाज़, रक्षा क्षेत्र में जहाज़ बनाने के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और अहम कदम है।
तटीय और उथले पानी में पानी के भीतर के खतरों का पता लगाने और उनका मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया ‘मंगरोल’ आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है, जिनमें ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार, हल्के वजन के टॉरपीडो, एक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और ‘मारीच’ उन्नत टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम शामिल हैं। वाटरजेट प्रोपल्शन (जल-नौदन प्रणाली) वाले तीन डीजल इंजनों से चलने वाला यह पोत उथले पानी में ऑपरेशन के दौरान आसानी से और तेज़ी से मुड़ने की क्षमता रखता है। यह पानी के नीचे निगरानी रखने, कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन और माइन वॉरफेयर (सुरंग युद्ध) से जुड़े काम करने में भी सक्षम है।
INS मंगरोल से तटीय सुरक्षा होगी मजबूत, पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता और स्वदेशी रक्षा तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
मंगरोल भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को मजबूत करेगा, खासकर तटीय इलाकों में जहाँ बड़े युद्धपोतों को काम करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यह जहाज़ समुद्री गश्ती विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य युद्धपोतों के साथ मिलकर पनडुब्बी से जुड़े खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने का काम कर सकता है। इसके शामिल होने से नौसेना के पत्तन, बंदरगाहों, और तटीय इलाकों की सुरक्षा करने की क्षमता बढ़ेगी और साथ ही बड़े बेड़े के अभियानों में भी मदद मिलेगी।
बदलते समुद्री सुरक्षा परिदृश्य में पानी के भीतर बढ़ते खतरों के बीच, ‘मंगरोल’ को नौसेना में शामिल करना विशेष रूप से तटीय जल क्षेत्रों में भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बेड़े में इस पोत का प्रवेश भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमताओं को भी दर्शाता है और यह अभियानगत तत्परता तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रति नौसेना के संकल्प को और मजबूत करता है।
