- केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानन्द ने डॉ. सूर्यकान्त को दी बधाई
लखनऊ। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान गतिविधियों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए “चिकित्सा उपकरणों की प्राथमिकता सूची” तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। इस दिशा में आईसीएमआर के महानिदेशक द्वारा ‘पल्मोनरी विषय विशेषज्ञ समिति’ का गठन किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष के रूप में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त को नामित किया गया है। यह नियुक्ति उनके क्षेत्र में उत्कृष्ट अनुभव और विशेषज्ञता को दर्शाती है।
पल्मोनरी विशेषज्ञ समिति का उद्देश्य देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना तथा आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। डॉ. सूर्यकान्त के नेतृत्व में यह समिति देश के पल्मोनरी स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में कार्य करेगी। समिति की पहली बैठक 23 अप्रैल 2026 को वर्चुअल/हाइब्रिड माध्यम से आयोजित की जाएगी, जिसमें चिकित्सा उपकरणों की प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानन्द ने आईसीएमआर द्वारा गठित पल्मोनरी विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष बनाए जाने पर डॉ. सूर्यकान्त को बधाई दी। कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. सूर्यकान्त के नेतृत्व में यह पहल देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में नई दिशा प्रदान करेगी।
पूर्व से ही डॉ. सूर्यकान्त आईसीएमआर की कई प्रोजेक्ट सेलेक्शन कमेटियों के भी अध्यक्ष हैं। आईसीएमआर द्वारा देशभर में टीबी के नए उपचार हेतु चलाए गए बीपाल प्रोजेक्ट के मुख्य पर्यवेक्षक भी रह चुके हैं। बीपाल प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ही एमडीआर-टीबी के नए उपचार में नई दवाओं को शुरू किया गया है। इसके साथ ही वे कई चिकित्सकीय, शोध व सामाजिक समितियों के अध्यक्ष, सदस्य व सलाहकार भी हैं। ज्ञात रहे कि डॉ. सूर्यकान्त ने ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी के क्षेत्र में केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिलाई है। रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग को विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरकुलोसिस द्वारा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी केयर चुना गया है।
डॉ. सूर्यकान्त को विश्व के सर्वोच्च 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की श्रेणी में भी स्थान प्राप्त है। वे रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में लगभग 30 वर्षों से चिकित्सा शिक्षक, 21 वर्षों से प्रोफेसर व 15 वर्षों से विभागाध्यक्ष के पद पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। नई शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी में 100 पुस्तकें जारी कीं, जिनमें उन्होंने दो पुस्तकों “अस्थमा में योग की भूमिका” व “टीबी” में योगदान दिया है। इसके साथ ही उन्होंने चिकित्सा विज्ञान संबंधी विषयों पर अब तक 23 पुस्तकें भी लिखी हैं तथा एलर्जी, अस्थमा, टीबी एवं कैंसर के क्षेत्र में उनके लगभग 1000 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। साथ ही 2 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट का भी श्रेय उन्हें जाता है।
उन्होंने 200 से अधिक मेडिकल पोस्टग्रेजुएट और शोध छात्रों के शोध कार्य का पर्यवेक्षण किया है और वे 30 पत्रिकाओं के संपादकीय/सलाहकार बोर्ड में शामिल हैं। साथ ही विभिन्न श्वसन रोगों पर अंतरराष्ट्रीय व भारतीय दिशानिर्देश तैयार करने वाली 26 समितियों में भी विशेषज्ञ के रूप में कार्य कर चुके हैं। एमबीबीएस और एमडी के अलावा उन्होंने 26 विषयों (जिनमें योग, नेचुरोपैथी, स्वास्थ्य शिक्षा और पोषण आदि शामिल हैं) में प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी पूरे किए हैं। इसके साथ ही 22 फेलोशिप और 21 ओरेशन अवॉर्ड का भी श्रेय उन्हें जाता है। उन्हें अब तक अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा 200 से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. सूर्यकान्त कोविड टीकाकरण के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ब्रांड एंबेसडर भी रह चुके हैं। वे पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से अपने लेखों, वार्ताओं तथा टी.वी., रेडियो व सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों में टीबी एवं अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं।
