Bronchoscopy Training Workshop at KGMU Lucknow: 250 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
लखनऊ। इंडियन एसोसिएशन फॉर ब्रोंकोलॉजी (IAB) एवं किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 10 मई 2026 को अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर, केजीएमयू, लखनऊ में बेसिक ब्रोंकोस्कोपी सर्टिफिकेशन कोर्स एवं हैंड्स-ऑन वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया।
इस शैक्षणिक कार्यशाला में लगभग 250 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य ब्रोंकोस्कोपी से संबंधित सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था। कार्यशाला की विशेषता ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण रही। ज्ञात रहे कि सांस की नली को Bronchus कहते हैं और इसकी दूरबीन की जाँच को Bronchoscopy कहते हैं। कार्यशाला के निदेशक मुंबई से इंडियन एसोसिएशन फॉर ब्रोंकोलॉजी (IAB) की सचिव डॉ. अमिता नेने एवं केजीएमयू, लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त रहे।
कार्यशाला के समन्वयक रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, केजीएमयू की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ज्योति बाजपेयी एवं मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ के डॉ. अभिषेक टंडन रहे। कार्यशाला के सबसे सराहनीय शैक्षणिक सत्रों में से एक “ब्रोंकोस्कोपिक मैनेजमेंट ऑफ हेमोप्टाइसिस (खांसी में खून आना)” विषय पर डॉ. सूर्यकान्त द्वारा दिया गया व्याख्यान रहा।
TB ही नहीं, Lung Cancer भी हो सकता है खांसी में खून आने का कारण
डॉ. सूर्यकान्त ने अपने विस्तृत व्याख्यान में हेमोप्टाइसिस के निदान एवं प्रबंधन में ब्रोंकोस्कोपी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला, विशेषकर जीवन-रक्षक परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता को विस्तार से समझाया। उन्होंने अपनी प्रकाशित पुस्तक अध्यायों एवं शैक्षणिक कार्यों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि Hemoptysis Respiratory Medicine की सबसे महत्वपूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण आपात स्थितियों में से एक है। उनका व्याख्यान खांसी में खून आने के कारणों की व्यावहारिक पहचान पर आधारित होने के कारण अत्यंत सराहा गया। डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि सामान्यतः लोग एवं कई चिकित्सक खांसी में खून आने का कारण केवल टीबी को मानते हैं, जबकि फेफड़ों का कैंसर, ब्रोंकाइटिस, ब्रोंकिइक्टेसिस, निमोनिया एवं पोस्ट-टीबी भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हेमोप्टाइसिस के कारणों की सही पहचान के लिए ब्रोंकोस्कोपी अत्यंत उपयोगी जांच है। कार्यशाला में कई वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. के. बी. गुप्ता, डॉ. एस. एन. गुप्ता, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. आनंद गुप्ता, डॉ. अशोक कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह, डॉ. हूडा शमीम एवं डॉ. रचित शर्मा प्रमुख रहे। कार्यक्रम का समापन ब्रोंकोस्कोपी शिक्षा को बढ़ावा देने, प्रक्रियात्मक प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने एवं पल्मोनरी मेडिसिन में अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित करने के संदेश के साथ हुआ।
