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प्रतापराव जाधव ने ‘आयुष चिंतन शिविर 2026’ का उद्घाटन किया

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डेस्क। आयुष मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज नई दिल्ली में ‘चिंतन शिविर 2026’ का उद्घाटन किया। यह दो दिवसीय रणनीतिक विचार-विमर्श कार्यक्रम आयुष के विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित सत्रों के साथ 17 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रमुख नीतियों पर चर्चा, संस्थानों को सुदृढ़ करने और आयुष क्षेत्र के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने पर विचार किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रतापराव जाधव ने कहा कि यह चिंतन शिविर आयुष क्षेत्र में नीति दिशा को सुदृढ़ करने और प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाता है। पहले चिंतन शिविर के आधार पर आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सम्मेलन का उद्देश्य प्रगति की समीक्षा करना, कमियों की पहचान करना और एक व्यावहारिक, भविष्य के अनुरूप रोडमैप तैयार करना है। उन्होंने ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ तथा ‘हील इन इंडिया, हील बाय इंडिया’ के दृष्टिकोण के अनुरूप जीवनशैली संबंधी रोगों से निपटने में आयुष की बढ़ती प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला।


मंत्री ने कहा कि बजट आवंटन में वृद्धि आयुष क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, अवसंरचना और वैश्विक पहुंच को सुदृढ़ करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, अंतर-मंत्रालयी समन्वय और समग्र सरकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया तथा नवाचार, डिजिटलीकरण, उद्यमिता और जन-जागरूकता पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने हितधारकों से आग्रह किया कि वे विचार-विमर्श को जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन योग्य परिणामों में परिवर्तित करें और विश्वास व्यक्त किया कि आयुष विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि चिंतन शिविर आयुष क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा और भविष्य की रूपरेखा तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने बताया कि प्रतापराव जाधव के मार्गदर्शन में मंत्रालय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय के माध्यम से आयुष को आगे बढ़ा रहा है, साथ ही अनुसंधान, वैश्विक सहयोग और जनसंपर्क को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह विचार-विमर्श समयबद्ध और क्रियान्वयन योग्य परिणामों में परिवर्तित होगा, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देगा।
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव अलार्मेलमंगई डी. ने कहा कि यह शिविर सार्थक संवाद और सहयोगात्मक नीति निर्माण को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि आयुष स्वास्थ्य क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है और इसे राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करने के महत्व पर बल दिया तथा युवा पेशेवरों और शोधकर्ताओं की भूमिका को भी रेखांकित किया।
उद्घाटन सत्र का एक प्रमुख आकर्षण अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान रहा, जो आयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज का विस्तार और दावों के निपटान तंत्र को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रो. पी.के. प्रजापति, निदेशक, एआईआईए और कस्तूरी सेनगुप्ता, महासचिव, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने केंद्रीय आयुष मंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया। जीआई काउंसिल के ईसी सदस्य प्रो. बेजोन के. मिश्रा भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने इस क्षेत्र में प्रगति के लिए मंत्री के निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय आयुष मंत्री ने मंत्रालय का आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल शुरू किया, जिससे वास्तविक समय में संवाद और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ‘आयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज की मानक दरों में संशोधन तथा विभिन्न उपचारों/हस्तक्षेपों के दावों के निपटान’ शीर्षक दस्तावेज भी जारी किया गया, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता, वहनीयता और मानकीकरण को बढ़ाना है। मंत्रालय ने आयुष बीमा के लिए टोल-फ्री नंबर (1800-11-0008) भी जारी किया।
आयुष मंत्रालय के सलाहकार (आयुर्वेद) डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी गणमान्य अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने उद्घाटन सत्र को सफल बनाने में सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की और आश्वासन दिया कि चिंतन शिविर में हुई चर्चा को आयुष क्षेत्र के विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रभावी परिणामों में परिवर्तित किया जाएगा।
कार्यक्रम के पहले दिन तीन विषयगत सत्र आयोजित किए गए, जिनमें क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। प्रथम सत्र में वर्ष 2023 में आयोजित पहले चिंतन शिविर के परिणामों और उस पर की गई कार्यवाही की समीक्षा की गई, जिससे भविष्य की नीति दिशा तय करने में सहायता मिलेगी। दूसरे सत्र “ट्रेडिशन टू ट्रांसलेशन: साक्ष्य, नवाचार और वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करना” में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक मान्यता के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। तीसरे सत्र “आयुष में वाद प्रबंधन और विधिक तैयारी” में विनियामक ढांचे और क्षेत्र के विस्तार में विधिक तैयारी के महत्व पर चर्चा की गई।

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