डेस्क। हिंदी सिनेमा के अभिनेता अर्जुन कपूर आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 26 जून 1985 को मुंबई में जन्मे अर्जुन एक प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता बोनी कपूर जाने-माने फिल्म निर्माता हैं, जबकि उनकी मां मोना शौरी कपूर एक सफल उद्यमी थीं। दादा सुरिंदर कपूर और चाचा अनिल कपूर व संजय कपूर भी फिल्म जगत की चर्चित हस्तियां रहे हैं। हालांकि फिल्मी पृष्ठभूमि होने के बावजूद अर्जुन के लिए सफलता का रास्ता आसान नहीं रहा।
अर्जुन कपूर की जिंदगी में कई ऐसे दौर आए, जिन्होंने उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाया। बचपन में माता-पिता के अलग होने का असर उनकी सेहत और मानसिक स्थिति पर पड़ा। तनाव के कारण उनका वजन लगातार बढ़ता गया और किशोरावस्था में वह लगभग 150 किलो तक पहुंच गए। अस्थमा जैसी स्वास्थ्य समस्या भी उनके लिए चुनौती बनी रही। लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत, अनुशासन और फिटनेस के प्रति समर्पण से खुद को पूरी तरह बदला और एक नई पहचान बनाई।
फिल्मी करियर की शुरुआत अर्जुन ने कैमरे के सामने नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे से की। उन्होंने ‘कल हो ना हो’ और ‘सलाम-ए-इश्क’ जैसी फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। इसके अलावा ‘नो एंट्री’ और ‘वांटेड’ जैसी फिल्मों में सहयोगी निर्माता के तौर पर भी अनुभव हासिल किया। इस दौरान उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियों को करीब से समझा।
साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘इश्कजादे’ से अर्जुन कपूर ने बतौर अभिनेता बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म में उनके साथ परिणीति चोपड़ा नजर आई थीं। उनकी दमदार शुरुआत को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा, वहीं उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता की श्रेणी में फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन भी मिला।
इसके बाद अर्जुन ने ‘गुंडे’, ‘2 स्टेट्स’, ‘फाइंडिंग फैनी’, ‘की एंड का’, ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ और ‘मुबारकां’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। खासतौर पर ‘2 स्टेट्स’ में उनके अभिनय को दर्शकों ने काफी पसंद किया और यह उनके करियर की उल्लेखनीय फिल्मों में शामिल रही।
लगातार चुनौतियों, आलोचनाओं और उतार-चढ़ाव के बावजूद अर्जुन कपूर ने हार नहीं मानी। उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर मुश्किल हालात को भी सफलता में बदला जा सकता है।
