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अमित शाह ने शिलांग में NEC की 73वीं बैठक की अध्यक्षता की

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नॉर्थईस्ट विकास और कनेक्टिविटी पर दिया जोर

शिलांग। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज मेघालय की राजधानी शिलांग में उत्तरपूर्वी परिषद (NEC) की 73वीं पूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मेघालय के राज्यपाल सी एच विजय शंकर, मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री सुकांत मजुमदार, केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव संजय जाजू उपस्थित थे। बैठक में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मिज़ोरम, नागालैंड और सिक्किम के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि विगत 12 साल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नॉर्थईस्ट पर फोकस के साथ विकास किया गया है। उस नींव पर विकसित नॉर्थईस्ट का निर्माण हो रहा है और पिछले 12 साल में पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में गुणात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी के अलावा शायद ही कोई ऐसा प्रधानमंत्री रहा होगा, जिसने नॉर्थईस्ट पर इतने फोकस तरीके से काम किया हो।

मोदी सरकार के 12 साल में नॉर्थईस्ट बना विकास का मॉडल

अमित शाह ने कहा कि अच्छी कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द्र के आधार पर ही विकास की नींव रखी जा सकती है। पिछले 12 साल में 12 से अधिक शांति समझौते कर नॉर्थईस्ट में विवादों का समाधान किया गया और 10 हज़ार 800 से अधिक युवाओं को हथियार डालने के बाद मेनस्ट्रीम में लाया गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नॉर्थईस्ट को इन्सर्जेंसी से मुक्त करा दिया है। नॉर्थईस्ट में पिछले 12 साल में सुनियोजित रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया गया है और विकसित रेल, रोड़ और एयर कनेक्टिविटी से दिल्ली और नॉर्थईस्ट के बीच की दूरी कम हुई है। मोदी सरकार के 12 साल में नॉर्थईस्ट के इन्फ्रास्ट्रक्चर में कई गुना विकास हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने दिल्ली और नॉर्थईस्ट के बीच न सिर्फ भौगोलिक दूरी कम की है बल्कि दिलों की दूरी को भी कम करने का काम किया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने Whole of the Government Approach के साथ इतने बड़े भूभाग के लिए पूरे मन और संवेदनशीलता के साथ काम किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 साल में नॉर्थईस्ट की विविधता पूरे विश्व के सामने एक बड़ी ताकत बनकर उभरी है। आज पूरा विश्व हमारे नॉर्थईस्ट को opportunity hotspot के रूप में जानता है। पहले नॉर्थईस्ट को विवादों के कारण जाना जाता था और आज इस क्षेत्र को सहअस्तित्व के कारण पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि नॉर्थईस्ट के 200 से ज्यादा जनजातीय समूहों, 195 से ज्यादा बोलियों, अनेक संस्कृतियों, खानपान और वेशभूषा की विविधता को संजो कर रखें और इसे और ताकत दें। अमित शाह ने कहा कि हम अपनी इस साझा संस्कृति का पुनर्निर्माण कर प्रधानमंत्री मोदी जी की अष्टलक्ष्मी की कल्पना को जमीन पर उतारें।

राइजिंग नॉर्थईस्ट समिट से क्षेत्रीय विकास को मिली नई गति

अमित शाह ने कहा कि हम Act East, Act Fast और Act First को ज़मीन पर उतारने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि नॉर्थईस्ट को हमने भगवान के भरोसे नहीं छोड़ा है। सिर्फ बजट से विकास नहीं होता, उसके साथ विजन, अच्छी प्लानिंग और बारीकी से क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग भी होनी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के 12 साल में यह सब बहुत अच्छे तरीके से हुआ है। शांति और स्थिरता की स्थापना, समृद्धि और विकास की शुरुआत और सांस्कृतिक पहचान को संजोकर रखने की चुनौतियों को पार कर आज पूरा नॉर्थईस्ट आगे बढ़ा है।

अमित शाह ने कहा कि नॉर्थईस्ट के विकास, समृद्धि और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए हाई लेवल टास्क फोर्स की रिपोर्ट महत्त्वपूर्ण है। बजट के सभी पैरामीटर्स में आने वाली मदों को अपने-अपने राज्य में उपयोग कर इस रिपोर्ट को 100% क्रियान्वयन की दिशा में ले जाएं। अब नॉर्थईस्ट की प्रायोरिटी को हमें इसी रिपोर्ट के आधार पर आकार देना होगा। उन्होंने कहा कि हम नॉर्थईस्ट के आठों राज्यों के राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान बड़ी इंडस्ट्री के साथ आने वाली ancillary को छोटे राज्यों में लगाकर आगे बढ़ाने का काम कर सकते हैं। लगभग 4.25 लाख करोड़ रूपए का निवेश असम की इन्वेस्टमेंट समिट के अतिरिक्त आया है जो नॉर्थईस्ट के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पर फोकस के प्रयास को दिखाता है। असम में 27 हज़ार करोड़ रूपए के निवेश के साथ सेमीकंडक्टर का प्लांट, नॉर्थईस्ट और पूर्व के कई देशों के लिए हेल्थ का हब बनाना, नामरूप में अमोनिया यूरिया कॉम्प्लेक्स से लॉजिस्टिक कॉस्ट कम करना, जैसे, प्रोजेक्ट्स के कारण नॉर्थईस्ट के कई राज्यों में विकास को गति मिली है।

नॉर्थईस्ट के सांस्कृतिक संरक्षण और GI Tag पर अमित शाह का बयान

अमित शाह ने कहा कि सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिर्फ कागज पर न रह जाए बल्कि इसके लिए हर राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को इसकी मासिक समीक्षा करनी चाहिए। गुवाहाटी, इंफाल और अगरतला को मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब के रूप में आगे बढ़ाने का काम सतत मॉनिटरिंग के साथ समयसीमा के अंदर पूरा करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्थईस्ट के सभी राज्यों को मछली, अंडा और दूध के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना चाहिए और सरप्लस को देश के बाकी हिस्सों में भेजना चाहिए। भारत के कई ऐसे राज्य हैं जहां डेयरी, किसानों और पशुपालकों की समृद्धि का कारण बनी है। श्री शाह ने कहा कि राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), सहकारिता मंत्रालय के साथ मिलकर यहां नए सिरे से शुरुआत कर रही है। हमने लक्ष्य रखा है कि अगले वित्तीय वर्ष से हर साल दूध देने वाले 50,000 से ज्यादा पशु एनडीडीबी के माध्यम से नॉर्थईस्ट के सभी राज्यों में भेजेंगे और इनके मिल्क कलेक्शन के लिए एक अच्छी कोऑपरेटिव व्यवस्था बनाएंगे। उन्होंने कहा कि अवसंरचनाओं की कनेक्टिविटी, सुनियोजित एकीकृत शहरीकरण और 15 उच्च संभावनाओं वाले क्षेत्रों का विकास सभी राज्यों का फोकस होना चाहिए।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार के विकास में पानी और कुदरती संपदा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो हमारे पूर्वोत्तर के राज्यों में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि NEC केवल निधि वितरण का मंच नहीं बनेगा बल्कि स्ट्रेटेजिक प्लानिंग की संस्था के रूप में उभर कर आएगा। श्री शाह ने कहा कि हम मानव संसाधनों का Across The States उपयोग बढ़ाना चाहते हैं और बंगाल के माध्यम से पूरे नॉर्थईस्ट में यह कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमने सबरूम लैंड पोर्ट के माध्यम से पूरे पूर्व के व्यापार का दरवाजा खोलने का काम किया है। पूर्वोत्तर अब दक्षिण पूर्व एशिया और इंडो पैसिफिक देशों के साथ व्यापार करने के लिए तैयार है।

अमित शाह ने कहा कि नॉर्थईस्ट के 200 से अधिक जनजातीय समुदायों और 200 भाषाओं और बोलियों को संजो कर रखना है। उत्तर पूर्व हजारों साल से सबको साथ में रखकर चलता आया है और इस विविधता को हमें अपनी ताकत में बदलने का काम करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर नॉर्थईस्ट की एक भी बोली कम होती है तो यह हमारे देश का बहुत बड़ा नुकसान है। इस जुनून के साथ नॉर्थईस्ट की पहचान को बनाए रखने के लिए सभी राज्यों को काम करना चाहिए। यह पूर्वोत्तर की बहुत बड़ी ताकत बन सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम डिवाइन योजना के तहत असम और त्रिपुरा में 65 करोड़ रुपए क्लस्टर प्रोजेक्ट के लिए मंज़ूर किये हैं और हमें इसे मॉडल बनाकर आगे बढ़ना पड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि GI Tag के लिए हमारी लगभग 215 फसल स्पर्धा में हैं। हर राज्य में एक टास्क फोर्स होनी चाहिए जो GI Tag को प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को लगातार मॉनिटर करे। उन्होंने यह भी कहा कि Healing India मिशन का आदर्श गंतव्य हमारा नॉर्थईस्ट ही है और हर राज्य को वेलनेस इंफ्रास्ट्रक्चर तथा हेल्थ टूरिज्म की नीति बनानी चाहिए।

डिजिटल इंडिया, AI और आईटी हब बनाने पर अमित शाह का बड़ा बयान

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 12 साल में नॉर्थईस्ट में हताहत नागरिकों की संख्या में 86% कमी आई है, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। 12 से अधिक ऐतिहासिक शांति समझौतों के बाद यहां विकास का बहुत अच्छा वातावरण बना है। श्री शाह ने कहा कि नार्थ-ईस्ट में नारकोटिक्स के ट्रांसपोर्टेशन और कंजप्शन को जड़ से समाप्त करने के लिए रुथलेस एप्रोच के साथ भारत सरकार ने एक विशेष कार्ययोजना बनाई है। उन्होंने कहा कि नॉर्थईस्ट के सभी मुख्यमंत्रियों को अपने राज्यों के नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों से अवगत कराने और उनके संरक्षण पर फोकस करना चाहिए, क्योंकि नार्थ-ईस्ट में उग्रवाद लगभग खत्म हो चुका है। गृह मंत्री ने कहा कि रूटीन पुलिसिंग के लिए नॉर्थईस्ट को नए सिरे से शुरुआत करनी चाहिए। गरीब, महिला, बच्चे के अधिकारों की रक्षा हमारा काम होना चाहिए। हमें हर नागरिक को उसके अधिकार देने की दिशा में नवीन न्याय संहिताओं के तहत समय पर न्याय देने, क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में टेक्नोलॉजी के उपयोग, सजा कराने की दर में सुधार के लिए फॉरेंसिक साइंस के उपयोग, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और कोर्ट में ऑनलाइन गवाही देने तक की पूरी व्यवस्था को सुनिश्चित करना है।

अमित शाह ने कहा कि AI, डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी डिजिटल स्किल में हमारे युवा बहुत अच्छे तरीके से परफॉर्म कर सकते हैं। हमें पूरे नॉर्थईस्ट को आईटी इंडस्ट्री का हब बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्थईस्ट में जल विद्युत और सौर ऊर्जा का बहुत पोटेंशियल है। हमें डेटा सेंटर्स को नॉर्थईस्ट की ओर आकर्षित करने की दिशा में भी काम करना चाहिए। इसके लिए हमें अपने एजुकेशन सिस्टम, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के रोडमैप और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के विजन को मिलाकर आगे बढ़ना चाहिए।

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