डेस्क। सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास को सुदृढ़ करने और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 1 मई, 2026 को केंद्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान (CIBS), लेह में आयोजित एक कार्यक्रम में विभिन्न प्रमुख पहलों का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह तथा लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना भी उपस्थित रहेंगे।
यह कार्यक्रम दूध प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने, कोल्ड-चेन प्रणालियों को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय डेयरी किसानों के लिए बाजार संपर्क को विस्तारित करने के उद्देश्य से विभिन्न डेयरी अवसंरचना परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास का साक्षी बनेगा। इस कार्यक्रम में क्षेत्र में सहकारी डेयरी संचालन के आधुनिकीकरण हेतु डिजिटल एवं संस्थागत पहलों का भी शुभारंभ किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री कारगिल में 10 टीएलपीडी क्षमता वाले डेयरी प्लांट का शिलान्यास करेंगे तथा लेह में दही एवं पनीर उत्पादन सहित नई डेयरी प्रसंस्करण इकाइयों का उद्घाटन करेंगे। इसके अतिरिक्त, दूध के भंडारण एवं परिवहन अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए बल्क मिल्क कूलर प्रणाली का शुभारंभ किया जाएगा।
सहकारी क्षेत्र में डिजिटल सशक्तीकरण के विजन को और मजबूत करते हुए, खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने तथा किसानों को भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एंड्रॉयड-आधारित ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन सिस्टम (AMCS) एप्लिकेशन का शुभारंभ किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत एक मोबाइल दूध परीक्षण प्रयोगशाला को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा, जिसका उद्देश्य गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा जमीनी स्तर पर डेयरी किसानों को सहयोग प्रदान करना है। प्रमुख हितधारकों के बीच डेयरी उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्धता और मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित होगी। सरकार के किसान कल्याण और सहकारी सशक्तीकरण पर विशेष जोर के अनुरूप, इस अवसर पर क्षेत्र के प्रगतिशील डेयरी किसानों को सम्मानित भी किया जाएगा। यह पहल सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने, ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने तथा देश के दूरस्थ क्षेत्रों में समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण को साकार करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
