लंबे समय से थे बीमार; जनसेवा और सादगी के लिए बनाई थी अलग पहचान
संजय मिश्र।
देवरिया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे आलमबदी आजमी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। कुछ समय से उनका इलाज लखनऊ के मेदांता अस्पताल में चल रहा था। चार दिन पहले उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उनके आजमगढ़ स्थित आवास लाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय स्तर पर शोक की लहर दौड़ गई।
इंजीनियर से बने जननेता, पांच बार पहुंचे विधानसभा
आलमबदी आजमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक सम्मानित चेहरा माने जाते थे। वह अपनी सादगी, साफ-सुथरी छवि और जनता से लगातार जुड़े रहने के लिए जाने जाते थे। राजनीतिक जीवन में उन्होंने जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी और लंबे समय तक क्षेत्र की सेवा की।
16 मार्च 1936 को आजमगढ़ में जन्मे आलमबदी आजमी ने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। राजनीति में आने से पहले वह इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 1996 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने राजनीतिक सफर में केवल एक बार चुनावी हार का सामना किया। इसके अलावा वह पांच बार विधायक चुने गए।
राजेश यादव बोले- अपूरणीय क्षति
समाजवादी आंदोलन से जुड़े आलमबदी आजमी को पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता था। वर्तमान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी उनका विशेष सम्मान करते थे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में उनकी अलग पहचान थी।
इस बीच समाजवादी पार्टी के देवरिया जिला उपाध्यक्ष राजेश यादव ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आलमबदी आजमी का पूरा जीवन समाजवादी विचारधारा, जनसेवा और सामाजिक सौहार्द के मूल्यों के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि वे सादगी, संघर्ष और जनता के प्रति समर्पण की मिसाल थे तथा उनका निधन समाजवादी परिवार और प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।
