गंभीर लक्षणों वाले मरीजों की RT-PCR जांच जरूरी
लखनऊ। लखनऊ। आज 26 सितंबर को जनपद लखनऊ में इन्फ्लुएंजा-ए (H1N1) के 3 नए मरीज पाए गए हैं। तीनों मरीज होम आइसोलेशन में हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनपद में वर्तमान में H1N1 के कुल 31 एक्टिव केस हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय से प्राप्त गाइडलाइन के अनुसार, तेज बुखार के साथ सीने में दर्द, बेहोशी, रक्तचाप कम होना, सांस फूलना, नाखूनों का नीला पड़ना या बलगम में खून आने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर मरीज को गंभीर श्रेणी में रखते हुए रियल टाइम आरटी-पीसीआर (Real-Time RT-PCR) जांच कराई जानी चाहिए। आवश्यकतानुसार मरीज को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर उपचार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वहीं, बुखार, जुकाम, गले में खराश, खांसी या फ्लू जैसे सामान्य लक्षण होने पर मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकीय परामर्श लेने और आवश्यक उपचार कराने की सलाह दी गई है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी. सिंह ने दी।
H1N1 में गंभीर लक्षणों पर तुरंत अस्पताल जाएं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिन मरीजों की पहले से मौजूद किसी गंभीर या पुरानी बीमारी की स्थिति बिगड़ने लगे, उन्हें भी गंभीर श्रेणी में रखते हुए तत्काल चिकित्सकीय सहायता दी जानी चाहिए। इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षणों से ग्रसित बच्चों में असामान्य उनींदापन या अत्यधिक सुस्ती (सोमनोलेंस), लगातार तेज बुखार, भोजन या तरल पदार्थ लेने में असमर्थता, झटके आना, तेज सांस चलना या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को भी गंभीर माना जाता है। गाइडलाइन के अनुसार ऐसे गंभीर मरीजों की रियल टाइम आरटी-पीसीआर जांच कराकर आवश्यकतानुसार अस्पताल में भर्ती कर उपचार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
गाइडलाइन के अनुसार सामान्य लक्षण वाले मरीजों को रियल टाइम आरटी-पीसीआर जांच की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मरीजों को घर पर रहकर पर्याप्त आराम करने, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लेने तथा संक्रमण फैलने से रोकने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों के निकट संपर्क में आने से बचने की सलाह दी गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों तथा डायबिटीज, रक्त एवं तंत्रिका विकार सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ये लोग संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षणों वाले मरीजों के उपचार के दौरान संक्रमण नियंत्रण के मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में मरीजों की स्क्रीनिंग, आवश्यकता के अनुसार अलग व्यवस्था, स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण से बचाव तथा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) के उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
