आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त हुआ इलाज
लखनऊ। लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। KGMU डॉक्टरों ने दो साल की बच्ची की रीढ़ की हड्डी की जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया है। बच्ची स्पाइनल टीबी के कारण रीढ़ की गंभीर विकृति से जूझ रही थी। ऑपरेशन के दौरान रीढ़ को सीधा कर उसे स्थिर किया गया।
KGMU के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इतनी कम उम्र की बच्ची में इस तरह की स्पाइनल डिफॉर्मिटी करेक्शन सर्जरी पहली बार की गई है। बच्ची को पहले बुखार आया था, जांच में रीढ़ की हड्डी में टीबी की पुष्टि हुई थी। इलाज के बावजूद परेशानी बढ़ने पर उसकी रीढ़ टेढ़ी होने लगी और दर्द भी बढ़ गया। परिजन उसे KGMU के हड्डी रोग विभाग लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी का फैसला लिया। ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत में सुधार है और डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।
रीढ़ की गंभीर विकृति का सफल इलाज, KGMU डॉक्टरों की बड़ी उपलब्धि
विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) टीम ने मात्र दो वर्ष की बच्ची की जटिल स्पाइनल डिफॉर्मिटी करेक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की। बच्ची थोरैसिक स्पाइनल ट्यूबरकुलोसिस (रीढ़ की हड्डी की टीबी) से पीड़ित थी, जिससे उसकी रीढ़ की D5 से D8 कशेरुकाएं प्रभावित हो गई थीं।
डॉक्टरों के अनुसार, एंटी-ट्यूबरकुलर दवाओं के नियमित उपचार के बावजूद बच्ची की रीढ़ में तेजी से कूबड़ (काइफोटिक डिफॉर्मिटी) विकसित हो रहा था। रीढ़ की हड्डियों को हुए नुकसान के कारण भविष्य में स्थायी विकृति, तंत्रिका तंत्र पर असर और सांस लेने में गंभीर परेशानी का खतरा बढ़ गया था। इन परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टरों ने प्रभावित हिस्से की सर्जरी कर रीढ़ को सीधा किया, उसे स्थिर बनाया और बच्ची की उम्र के अनुरूप विशेष उपकरणों की मदद से उसका पुनर्निर्माण किया।
KGMU की टीम ने रचा इतिहास, आयुष्मान योजना में हुआ निःशुल्क इलाज
इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व प्रोफेसर शाह वलीउल्लाह, डॉ. सैयद फैसल अफाक और प्रोफेसर विकास वर्मा ने किया। वहीं एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी प्रोफेसर बी.बी. कुशवाहा और उनकी टीम ने संभाली। सर्जरी के दौरान विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने मिलकर उपचार को सफल बनाया।
केजीएमयू के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पहली बार केवल दो वर्ष की उम्र के बच्चे की इतनी जटिल स्पाइनल डिफॉर्मिटी करेक्शन सर्जरी की गई है। निजी या कॉरपोरेट अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी पर लगभग 10 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, लेकिन केजीएमयू में यह पूरी प्रक्रिया आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क की गई।

इस उपलब्धि पर केजीएमयू के कुलपति ने पूरी सर्जिकल, एनेस्थीसिया, नर्सिंग और सहयोगी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वय और टीमवर्क के कारण इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सका, जिससे बच्ची को बेहतर जीवन की नई उम्मीद मिली।
