बैठक नहीं, एक्शन प्लान नहीं, विकास कार्य पूरी तरह ठप
संजय मिश्र।
देवरिया। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन, उत्तर प्रदेश के जिलाध्यक्ष महेश्वर मिश्र बबलू ने आरोप लगाया है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जिले की ग्राम पंचायतों में अब तक बैठकें आयोजित नहीं कराई गई हैं और न ही विकास कार्यों के लिए कार्ययोजना (एक्शन प्लान) फीड की गई है।
उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ाए जाने के लगभग दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अधिकांश ग्राम पंचायतों में विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। उनका आरोप है कि विकास खंड स्तर के अधिकारी और कर्मचारी ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानों के फोन नहीं उठाए जा रहे हैं और उन्हें आवश्यक प्रशासनिक जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
मनरेगा भुगतान और प्रशासनिक अधिकार पर प्रधानों की नाराजगी
महेश्वर मिश्र ने कहा कि सरकार की महत्वाकांक्षी पौधारोपण योजना शुरू हो चुकी है और प्रधानों पर इसे सफलतापूर्वक संचालित करने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि जब प्रधानों को प्रशासनिक अधिकार ही नहीं दिए जा रहे हैं, तब उनसे इस योजना के क्रियान्वयन की अपेक्षा करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पौधारोपण कार्य में होने वाले खर्च का भुगतान किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा, इस संबंध में भी कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्व में ग्राम प्रधान अपने नियमित कार्यकाल के दौरान मनरेगा के माध्यम से मजदूरों से ऐसे कार्य कराते थे। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में मजदूर पहले मजदूरी भुगतान की गारंटी मांग रहे हैं, क्योंकि उनके अनुसार प्रधानों को प्रशासनिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं। इससे ग्राम प्रधानों को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पंचायत चुनाव से पहले अधिकारों को लेकर प्रधान संगठन का विरोध
महेश्वर मिश्र ने कहा कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल स्वयं प्रधानों ने नहीं बढ़ाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय के तहत इसे छह माह के लिए बढ़ाया गया है। उनका प्रश्न है कि यदि सरकार ने प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य करने का अधिकार दिया है, तो विकास खंड स्तर के अधिकारी उनके साथ सहयोगात्मक रवैया क्यों नहीं अपना रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी यह मानकर कार्य कर रहे हैं कि 13 जुलाई को उच्च न्यायालय प्रधानों के कार्यकाल की समाप्ति से संबंधित निर्णय देगा और उसके बाद एडीओ एवं बीडीओ प्रशासक बन जाएंगे। इसी कारण वर्तमान में प्रधानों को अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय ने प्रधानों का कार्यकाल समाप्त करने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि केवल समयबद्ध पंचायत चुनाव कराने की बात कही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है। आयोग की रिपोर्ट के बाद आरक्षण, परिसीमन और पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी होगी। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के पूर्ण होने से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। इसके बावजूद विकास खंड स्तर पर प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य करने से रोका जाना शासन के आदेशों की अवहेलना है।
महेश्वर मिश्र ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही ग्राम पंचायतों में बैठकें आयोजित कर कार्ययोजना स्वीकृत नहीं की गई और विकास कार्य शुरू नहीं हुए, तो राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
