पंडित नारायण दत्त तिवारी।
देवरिया। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान Lord Shiva को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से शिव पूजा और शिव महापुराण का श्रवण करने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और उसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। सोमवार के दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। महिलाएं और युवतियां विशेष रूप से सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत और पूजा से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। धार्मिक जानकारों के अनुसार सच्चे मन और श्रद्धा से की गई भगवान शिव की आराधना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और शांति लेकर आती है।
शिवमहापुराण का आध्यात्मिक संदेश
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव ऐसे देव हैं जो मात्र एक लोटा जल अर्पित करने से भी भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। मान्यता है कि शिव महापुराण का पाठ और श्रवण करने से मनुष्य पापों से मुक्त होकर शिवलोक की प्राप्ति करता है। मान्यता है कि श्रद्धा भाव से शिवमहापुराण का श्रवण करने से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और उसे मानसिक शांति प्राप्त होती है। पुराण में यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति भगवान शिव का स्मरण करते हुए इस ग्रंथ का पाठ करता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। धार्मिक परंपराओं में शिवमहापुराण को मोक्षदायक ग्रंथ माना गया है। कहा जाता है कि इसका श्रवण व्यक्ति को लोभ, क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर कर आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करता है। शिवमहापुराण केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला भी सिखाता है। इसमें बताया गया है कि संसार में सबसे बड़ा धर्म सत्य, दया और सेवा है। भगवान शिव का सरल और सहज स्वरूप यह संदेश देता है कि ईश्वर तक पहुंचने के लिए दिखावे नहीं, बल्कि सच्चे मन और श्रद्धा की आवश्यकता होती है। ग्रंथ में यह भी वर्णित है कि भगवान शिव अपने भक्तों की भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। यही कारण है कि उन्हें ‘भोलेनाथ’ कहा जाता है। एक लोटा जल, बेलपत्र और सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा भी भगवान शिव को प्रिय मानी जाती है।
सोमवार को ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी और गंगाजल से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। पंचामृत से अभिषेक के बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत, भस्म और सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा का पाठ या ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। पूजा के अंत में आरती कर प्रसाद अर्पित किया जाता है।
शिव पूजा का शुभ समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह 4 बजे से 7 बजे तक का ब्रह्म मुहूर्त शिव पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। वहीं प्रदोष काल में की गई पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे पहले और बाद तक का समय होता है।
पूजा के दौरान करें इन मंत्रों का जाप
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
जीवन के लिए क्या सीख देता है शिवमहापुराण?
- अहंकार का त्याग करें
- सत्य और धर्म के मार्ग पर चलें
- क्रोध और लालच से दूर रहें
- भक्ति और सेवा को जीवन का आधार बनाएं
- प्रकृति और जीवों के प्रति करुणा रखें
