डेस्क। बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, भारत और दुनिया भर में मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण बौद्ध पर्व है। यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाओं—जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण—की स्मृति में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 1 मई को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान बुद्ध के आदर्शों को साकार करने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता प्रकट की। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि भगवान बुद्ध के विचार समाज में आनंद और एकजुटता की भावना को और प्रगाढ़ करेंगे। उन्होंने इस पवित्र अवसर पर सभी से भगवान बुद्ध के जीवन मूल्यों को अपनाने के संकल्प को दोहराने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अवसर हमें शांति, करुणा और सद्भावना के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि गौतम बुद्ध के अनुसार, जब कोई व्यक्ति यह समझ लेता है कि उसके भीतर या बाहर कोई भी सत्ता स्थायी या स्व-अस्तित्ववान नहीं है, और जब वह ‘अष्टांगिक मार्ग’—यानी सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प और सम्यक आचरण—का अनुसरण करता है, तो वह दुखों से मुक्त हो जाता है और परम शांति को प्राप्त करता है।
प्रधानमंत्री ने ‘X’ पर पोस्ट में लिखा
“बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान बुद्ध के आदर्शों को साकार करने की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता अत्यंत दृढ़ है। कामना है कि उनके विचार हमारे समाज में आनंद और एकजुटता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करें।” “सभी देशवासियों को बुद्ध पूर्णिमा की असीम शुभकामनाएं। शांति, करुणा और सद्भावना के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाले इस पावन अवसर पर आइए, भगवान बुद्ध के जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प दोहराएं।
नान्तर्बहिश्च लोकेषु त्वात्मानं दृष्टवान् क्वचित्।
आष्टाङ्गिकेन मार्गेण परमां शान्तिमाययौ॥”
गौतम बुद्ध के अनुसार, जब कोई व्यक्ति यह समझ जाता है कि उसके भीतर या बाहर कोई भी स्थायी, स्व-अस्तित्ववान सत्ता नहीं है, और ‘अष्टांगिक मार्ग’—यानी सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प और सम्यक आचरण—का पालन करता है, तब वह दुखों से मुक्त हो जाता है और परम शांति को प्राप्त करता है।
बुद्ध पूर्णिमा का महत्व
बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानवता को सत्य, अहिंसा, करुणा और आत्मज्ञान का संदेश देने वाला दिन है। भगवान बुद्ध ने जीवन के दुखों से मुक्ति पाने के लिए मध्यम मार्ग (Middle Path) अपनाने की शिक्षा दी, जो आज भी प्रासंगिक है।
बुद्ध के उपदेश: आज के जीवन में प्रासंगिक
भगवान बुद्ध के विचार आज भी हमें एक बेहतर जीवन जीने की दिशा दिखाते हैं:
- अहिंसा और करुणा – सभी जीवों के प्रति दया रखें
- सम्यक विचार और आत्मज्ञान – सही सोच और आत्मचिंतन अपनाएं
- मध्यम मार्ग – अतियों से बचकर संतुलित जीवन जिएं
- सत्य वचन – हमेशा सच बोलें
