- पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह पर्यटन स्थायी समिति के साथ की अहम बैठक, सुझाव-परामर्श का किया स्वागत
- पर्यटन मंत्री ने उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व परामर्शदात्री समिति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर किया विमर्श
- पर्यटन और विरासत साथ-साथ, राज्य के 39 स्मारकों के संरक्षण को मंजूरी
- बैठक में हर बिंदु पर मंथन, कनेक्टिविटी, ठहराव और अनुभवात्मक पर्यटन पर विशेष ध्यान
- जनप्रतिनिधियों के सुझावों से बनेगी नई राह, प्रदेश पर्यटन को मिलेगा बल- जयवीर सिंह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को पर्यटन निदेशालय में उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में पर्यटन स्थायी समिति के सदस्यों ने सुझाव, परामर्श और विचार प्रस्तुत किये। पर्यटन मंत्री ने जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से लेते हुए विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को उसके जल्द निस्तारण के आदेश दिए। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, ‘स्थायी समिति की तीसरी बैठक में विभिन्न बिंदुओं पर कई महत्वपूर्ण परामर्श मिले हैं। विभाग उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करेगा, ताकि प्रदेश पर्यटन को गति मिल सके।’
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश का पर्यटन तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से पहले इस क्षेत्र में सीमित कार्य होते थे, लेकिन 2022 के बाद पर्यटन विकास ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। मंत्री ने आगे कहा कि जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के गठन के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वर्तमान सरकार प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में धार्मिक, आध्यात्मिक और आस्था स्थलों के विकास के साथ-साथ उनकी बेहतर पहुंच सुनिश्चित कर रही है, जिसके चलते प्रदेश में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।’
एक्सपीरियंशल टूरिज्म पर रहेगा जोर
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का उत्तर प्रदेश आगमन अभूतपूर्व रहा। महाकुंभ-2025 के दौरान पर्यटक संख्या ने नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने बताया कि स्पिरिचुअल ट्रायंगल (प्रयागराज-अयोध्या-काशी) के माध्यम से प्रदेश आने वाले श्रद्धालुओं/पर्यटकों को समग्र आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया जा रहा है। पर्यटन मंत्री ने कहा, भविष्य के लिए पर्यटन विभाग का जोर एक्सपीरियंशल टूरिज्म (अनुभवात्मक पर्यटन) पर रहेगा। हमारा प्रयास है कि कोई पर्यटक प्रदेश के किसी गंतव्य की सैर के लिए पहुंचे तो कुछ दिन वहां ठहरे। इससे एक तरफ जहां स्थानीय संस्कृति और समुदाय को समझने का मौका तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा।’
स्थायी समिति के सदस्यों ने दिए अहम सुझाव
स्थायी समिति की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने पर्यटन विकास को लेकर अपने सुझाव रखे। झांसी नगर विधायक रवि शर्मा ने बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन संभावनाओं के विस्तार पर जोर देते हुए कई अहम प्रस्ताव दिए। उन्होंने पर्यटन मंत्री और अधिकारियों को मध्य प्रदेश टूरिज्म के साथ साझा प्रयासों के तहत हेली सर्विस शुरू करने का सुझाव दिया, ताकि क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश पर्यटन विभाग झांसी को केवल घूमने तक सीमित न रखे, बल्कि इसे पर्यटकों के ठहराव के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाए।
इसी तरह, प्रयागराज (शहर उत्तरी) के विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी ने महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए आभार जताया। उन्होंने संगम क्षेत्र में वाटर स्पोर्ट्स की संभावनाओं और त्रिवेणी महोत्सव के फिर से शुरू किए जाने का पर्यटन मंत्री से अनुरोध किया। वहीं, कानपुर नगर की कल्याणपुर विधानसभा सीट से विधायक नीलिमा कटियार ने अपने शहर की ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ की छवि से पर्यटन को जोड़ते हुए युवाओं, स्टार्ट अप सहित अन्य संभावनाएं तलाशने का सुझाव दिया। विधायक उमर अली खान ने सहारनपुर के मोहंड रेंज में जंगल सफारी विकसित करने और ओडीओपी उत्पाद वुडन वर्क को पर्यटन के साथ प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव रखा। इसी प्रकार, सैदपुर विधानसभा सीट (गाजीपुर) से विधायक अंकित भारती और विधान परिषद सदस्य मनीष कुमार ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
पर्यटन का बजट 22 गुना तक बढ़ा- अपर मुख्य सचिव
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने कहा कि ‘पर्यटन में आम आदमी और जनप्रतिनिधि दोनों की रुचि रहती है। इसलिए समग्र विकास में हर बिंदु और पक्ष का विशेष ध्यान रखा जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन का बजट करीब 22 गुना और संस्कृति का 20 गुना बढ़ा है। वन ट्रिलियन इकॉनमी के लक्ष्य हासिल करने की दिशा में पर्यटन का विशेष योगदान होगा। उन्होंने कहा, कि विभाग सर्किट के स्तर पर विकास कार्य कर रही है। कॉरिडोर, अल्पज्ञात स्थलों और चर्चित गंतव्यों को वरीयता के आधार पर विकसित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इनबाउंड टूरिज्म पर जोर रहेगा। कहा, नौसेना शौर्य संग्रहालय, शिवाजी म्यूजियम, फ़िरोज़ाबाद में बैंगल म्यूजियम, कुशीनगर और झांसी म्यूजियम तथा आर्य संस्कृति संकुल जैसे प्रयास प्रदेश भर में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन विकास को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने मंडल स्तर पर ‘कल्चरल कैफे’ विकसित किए जाने की भी बात कही।’
39 स्मारकों के संरक्षण को स्वीकृति
इससे पूर्व, पर्यटन मंत्री की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में प्रदेश के 41 स्मारकों को संरक्षण के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा गया, जिनमें से 39 स्मारकों को संरक्षण के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी गई। वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के अंतर्गत 278 स्मारक संरक्षित हैं। बैठक का एजेंडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस निर्देश के अनुरूप निर्धारित किया गया, जिसमें वर्ष 2027 तक राज्य में संरक्षित स्मारकों की संख्या बढ़ाकर 300 करने का लक्ष्य तय किया गया है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि यह प्रयास प्रधानमंत्री के दूरदर्शी मंत्र ‘विकास भी, विरासत भी’ के अनुरूप प्रदेश में पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं समग्र विकास को नई दिशा देगा। पर्यटन स्थायी समिति की बैठक से पूर्व पर्यटन महानिदेशक डॉ० वेदपति मिश्रा ने सभी उपस्थित सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों का औपचारिक स्वागत किया। इस अवसर पर पर्यटन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति रही।
