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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के प्रतिभागियों से बातचीत की

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डेस्क। केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 22 अप्रैल को उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की प्रमुख पहल, अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के विद्यार्थियों के साथ आभासी रूप से संवाद किया। कार्यक्रम में मंत्रालय के सचिव संजय जाजू, संयुक्त सचिव नीरज कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंतर्गत मंत्री ने आईआईटी गुवाहाटी, असम विश्वविद्यालय और तेजपुर विश्वविद्यालय में क्रमशः 13वें, 14वें और 15वें बैच के विद्यार्थियों के साथ बातचीत की। प्रत्येक बैच में 100 छात्र शामिल हुए, जिनमें छत्तीसगढ़, नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गोवा से 20-20 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन सभी विद्यार्थियों ने 15 मार्च, 2026 से 10 अप्रैल, 2026 तक चलने वाले युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में भाग लिया।
संवादात्मक कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास (डीओएनईआर) के संयुक्त सचिव नीरज कुमार के उद्घाटन उद्बोधन से हुआ, जिसके बाद केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इसे मुख्य रूप से संबोधित किया। संवादात्मक सत्र के दौरान, विद्यार्थियों ने अनुभव यात्रा (शैक्षणिक भ्रमण) से संबंधित अपने अनुभव और विचार साझा किए।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग की रागिनी साहू ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के अनूठे पहलुओं का उल्लेख किया, जिसमें विभिन्न स्थानों की यात्राएं शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अनुभव यात्राएं अत्यंत मूल्यवान होती हैं और पूरे देश के छात्रों को ऐसी यात्राओं के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ के एक अन्य प्रतिभागी हरीश कुमार साहू ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की यात्रा के बाद, उन्हें वास्तविक रूप से समझ आया कि इस क्षेत्र को “अष्टलक्ष्मी” क्यों कहा जाता है, जो इसकी समृद्धि और विविधता का प्रतीक है।
नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया की इफराह कावा ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस क्षेत्र के आत्मीयता से भरे आतिथ्य सत्कार की सराहना की और पूर्वोत्तर क्षेत्र के आतिथ्य प्रबंधन और सांस्कृतिक समृद्धि का उल्लेख किया।
मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की शैली तिवारी ने अपनी यात्रा में हासिल समृद्ध अनुभव की चर्चा की। इसमें वायुसेना स्टेशन का दौरा, असम राइफल्स के अधिकारियों के साथ बातचीत, सीढ़ीदार खेती, बांस के घरों को देखने का अनुभव और क्षेत्र की विविध आदिवासी संस्कृतियों से परिचय शामिल रहा।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के विकास बाली ने बताया कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र की उनकी यात्रा निश्चित रूप से ज्ञानवर्धक रही। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को प्रत्यक्षतः देखने से वहां की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और विविधता की गहरी समझ मिली, जिससे यह ज्ञानवर्धक और यादगार अनुभव रहा।
गोवा के वालपोई स्थित सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय की दीक्षा डी. गांवकर का संवाद सबसे रोचक रहा। पूर्वोत्तर क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, लोगों और स्थानीय व्यंजनों की सराहना करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को यादगार बताया। संवाद में उनके साथ गोवा के अन्य छात्र भी शामिल हुए, जिन्होंने असमिया भाषा में एक गीत गाया, जो इस क्षेत्र के प्रति उनकी सांस्कृतिक सराहना और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।
मंत्री ने विद्यार्थियों द्वारा साझा किए गए अनुभवों की सराहना की और उन्हें अपने राज्यों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के राजदूत के तौर पर कार्य करने को प्रोत्साहित किया। श्री सिंधिया ने उन्हें राष्ट्रीय एकता, परस्पर सम्मान और देश के युवाओं में साझा दायित्व की भावना सुदृढ़ बनाने में इस तरह के युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया।
केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ने दोहराया कि अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण से प्रेरित है कि युवाओं को पूर्वोत्तर भारत की वास्तविक संस्कृति, लोगों और परंपराओं का अनुभव कराया जाए और वे वहां से एकता और एकीकरण के राजदूत के रूप में वापस लौटें।
उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास सचिव संजय जाजू के संबोधन से कार्यक्रम का समापन हुआ। उन्होंने इस पहल को सफल बनाने के लिए सभी सहभागी विद्यार्थियों, सहयोगी संस्थानों और हितधारकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का सफल आयोजन राष्ट्रीय एकता और युवा सहभागिता की बढ़ती भावना दर्शाता है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और उनसे कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को आगे ले जाने तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के राजदूत के रूप में पूरे देश में कार्य करने को प्रोत्साहित किया।

अष्टलक्ष्मी दर्शन – युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम

उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) ने हाल ही में प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में “अष्टलक्ष्मी दर्शन – युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम” नामक एक अग्रणी पहल शुरू की है। अष्टलक्ष्मी पूर्वोत्तर भारत के 8 राज्यों के समूह को कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम को देश की समृद्धि और विकास के प्रतीक के रूप में ‘अष्टलक्ष्मी’ का नाम दिया है। उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) द्वारा कार्यान्वित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भावनात्मक मेल-मिलाप को बढ़ावा देना, लोगों के आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाना, उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) के बारे में समझ बढ़ाना और साझा दायित्व की भावना मजबूत करना है। इसमें 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी का विचार किया गया है, जो 14 दिवसीय गहन अनुभव यात्राओं, शैक्षणिक सत्रों, विरासत स्थलों के भ्रमण और स्थानीय समुदाय के साथ संवाद द्वारा युवाओं के बीच सार्थक जुड़ाव, सांस्कृतिक समझ और सराहना को बढ़ावा देती है।

1 नवंबर, 2025 को औपचारिक शुभारंभ के बाद से यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 15 समूहों में 530 विद्यार्थियों ने युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में भाग लिया और पूर्वोत्तर क्षेत्र के 8 राज्यों का दौरा किया तथा 11 विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ जुड़ाव स्थापित किया।

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