डेस्क। सीएसआईआर-मानव संसाधन विकास केंद्र (सीएसआईआर-एचआरडीसी), गाजियाबाद में “एआई-संचालित औषधि खोज: उन्नत उपकरण, तकनीक और अनुप्रयोग” विषय पर तीन दिवसीय गहन कार्यशाला का आयोजन 7 से 9 अप्रैल, 2026 तक सफलतापूर्वक किया गया। इस कार्यक्रम को विशेष रूप से सीएसआईआर के वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के लिए तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य उन्हें आधुनिक औषधि खोज में क्रांति लाने वाले अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपकरणों के बारे में उन्नत ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
इस कार्यशाला का उद्घाटन आईआईटी हैदराबाद में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर जीएन शास्त्री; सीएसआईआर-एचआरडीसी के प्रमुख डॉ. टीएस राणा; वैज्ञानिक जी और कार्यक्रम संयोजक डॉ. विनय कुमार और कार्यक्रम समन्वयक श्रीमती प्रीति चौधरी सहित कई बड़ी हस्तियों की उपस्थिति में किया गया। अपने उद्घाटन भाषण में प्रोफेसर शास्त्री ने औषधि खोज प्रक्रिया में क्रांति लाने में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला और फार्मास्युटिकल अनुसंधान में अंतःविषयक दृष्टिकोणों के बढ़ते महत्व पर बल दिया। डॉ. विनय कुमार ने कार्यशाला का एक व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने एआई-संचालित औषधि खोज में उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए इस कार्यक्रम की परिकल्पना के पीछे के तर्क, इसके दृष्टिकोण और उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
तीन दिनों तक चले इस कार्यशाला में प्रमुख संस्थानों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने ज्ञानवर्धक व्याख्यान और संवादात्मक सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित की। इन विशेषज्ञों में प्रो. प्रभा गर्ग (एनआईपीईआर, एसएएस नगर), प्रो. डी. सुंदर (निदेशक, आईबीएबी), डॉ. अरिजीत रॉय (टीसीएस, हैदराबाद) और डॉ. एस. नागमणि (सीएसआईआर-एनईएसटी) शामिल रहे, जिन्होंने एआई-संचालित औषधि खोज में अपनी विशेषज्ञता, वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों और उभरते दृष्टिकोणों को साझा किया।
लक्ष्य पहचान और बायोमार्कर पहचान में एआई, एआई-सहायता प्राप्त आणविक डॉकिंग और स्कोरिंग तथा द्विआणविक सिमुलेशन में एआई पर आयोजित तकनीकी सत्रों को विशेष रूप से सराहा गया। डॉ. रजनीश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर (आईआईटी बीएचयू, वाराणसी), डॉ. फिरोज खान (सीएसआईआर-सीआईएमएपी) और डॉ. तारक कर्माकर (आईआईटी दिल्ली) जैसे विशेषज्ञों ने गहन ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्रदान किए, जिससे औषधि खोज में उन्नत कम्प्यूटेशनल दृष्टिकोणों के बारे में प्रतिभागियों की समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
कार्यशाला का समापन 9 अप्रैल, 2026 को डॉ. टी.एस. राणा और डॉ. विनय कुमार द्वारा सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित करने के साथ हुआ, जिसमें कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी को मान्यता दी गई। सत्र का समापन प्रीति चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया। उन्होंने कार्यक्रम को भव्य सफलता दिलाने में अपने बहुमूल्य योगदान के लिए सभी विशिष्ट वक्ताओं, गणमान्य हस्तियों और प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस कार्यशाला को लेकर प्रतिभागियों ने अत्यंत सकारात्मक और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया दी, जो भविष्य में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगी। इस कार्यक्रम ने एआई-आधारित दवा खोज के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान, कौशल संवर्धन और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक गतिशील मंच के रूप में काम
