डेस्क। आज 30 मार्च को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सोम प्रदोष व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इसे अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत आज सुबह 07:09 बजे से हुई है, जिसका समापन 31 मार्च को सुबह 06:55 बजे होगा। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है, जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है। आज प्रदोष कालीन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:38 बजे से रात 08:57 बजे तक रहेगा। हर महीने में सामान्यतः दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं, लेकिन इस बार मार्च माह में तीन प्रदोष व्रत पड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया है। सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से सोमवार के दिन पड़ने के कारण अधिक फलदायी माना जाता है।
पूजा विधि:
व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, फल, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान शक्कर और घी से बने मिष्ठान का भोग लगाया जाता है।
इसके पश्चात शिव मंत्र, शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ किया जाता है तथा अंत में घी के दीपक से आरती की जाती है। व्रती दिनभर उपवास रखकर भगवान शिव का स्मरण करते हैं और शाम को पुनः स्नान कर प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा करते हैं।
प्रमुख मंत्र:
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः
- ॐ ऐं ह्रीं शिव-गौरीमय ह्रीं ऐं ॐ
- ॐ नमो धनदाय स्वाहा
महामृत्युंजय मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत विशेष रूप से चंद्र दोषों को शांत करने, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति लाने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
