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जल जीवन मिशन 2.0: मेघालय 12वां राज्य बना

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डेस्क। मेघालय ने परिणामोन्मुखी और सेवा-उन्मुख ग्रामीण जल आपूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मेघालय जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के तहत केंद्र सरकार के साथ सुधार-सम्बंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने वाला बारहवां राज्य बन गया है। यह राज्य अब जल जीवन मिशन 2.0 के सुधार-सम्बंधी कायों को पूरा करने के लिए औपचारिक रूप से काम करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च, 2026 को मंजूरी दी थी।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनरैड के. संगमा की वर्चुअल उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। मेघालय के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (पीएचई) मंत्री मारकुइस एन. मारक; सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (पीएचई) आयुक्त एवं सचिव प्रवीण बख्शी; पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) के सचिव अशोक के.के. मीना; राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन; और डीडीडब्ल्यूएस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे। जिला जल एवं स्वच्छता मंत्रालय (डीडब्ल्यूएस) के सचिव अशोक के.के. मीना ने अपने आरंभिक संबोधन में इस बात पर बल दिया कि समझौता ज्ञापन में न केवल पाइपलाइनों के बुनियादी ढांचे के निर्माण को प्राथमिकता दी गई है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रबंधित स्थायी सेवाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को गांवों में जल आपूर्ति प्रणालियों के प्रबंधन और संचालन का अधिकार देने वाले विकेंद्रीकरण और सामुदायिक स्वामित्व पर बल दिया। ग्राम स्तर पर कार्य योजनाएं विकसित की जा सकें और पंचायत प्रमाण पत्र जारी करने के उद्देश्य से प्रमुख सुधार उपायों में जिला जल एवं स्वच्छता मिशनों (डीडब्ल्यूएसएम) की शीघ्र स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया गया है। डीडब्ल्यूएसएम के प्रमुख जिला प्रशासन कार्यान्वयन की निगरानी करेंगे और त्वरित सहायता प्रदान करेंगे।
मीना ने इस समझौता ज्ञापन को सतत जल सुरक्षा के लिए साझा संकल्प बताते हुए इसे केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से जल-सुरक्षित भारत के निर्माण के राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ा। जल शक्ति मंत्रालय के डीडीडब्ल्यूएस में संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीना नाइक और मेघालय सरकार के पीएचई प्रवीण बख्शी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और समझौते का आदान-प्रदान किया गया।
जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बताया कि मेघालय ने मिशन के अंतर्गत सराहनीय प्रगति करते हुए 83 प्रतिशत कवरेज हासिल कर ली है। उन्होंने राज्य सरकार से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप कार्यान्वयन में तेजी लाने और शेष कार्य को शीघ्रता से पूरा करने का आग्रह किया। जल जीवन मिशन की समयसीमा के विकास को याद करते हुए, सी.आर. पाटिल ने कहा कि पूरे देश में 100 प्रतिशत नल जल वितरण और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए पहले मूल समय सीमा मई 2024 थी, लेकिन प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार इसे दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मिशन के लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन को मंजूरी दे दी है। इसमें लगभग 67,300 करोड़ रुपये 2025-26 के केंद्रीय बजट में आवंटित किए गए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समझौता ज्ञापनों के माध्यम से राज्य सरकार इन निधियों का कुशलतापूर्वक उपयोग करेगी और क्रियान्वयन के उच्च मानकों को बनाए रखेगी।

केंद्रीय मंत्री व्यापक दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए इस बात पर बल दिया कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल प्रत्येक घर में नल के पानी की सुनिश्चित आपूर्ति और उचित स्वच्छता सुनिश्चित होने पर ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने जल जीवन मिशन को विश्व स्तर पर अपनी तरह के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक बताया और प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता और जवाबदेही बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। चूक के प्रति शून्य-सहिष्णुता के दृष्टिकोण को दोहराते हुए श्री पाटिल ने कहा कि समझौता ज्ञापन के ढांचे के अंतर्गत सख्त जवाबदेही उपायों को शामिल किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य द्वारा प्रस्तुत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) वर्तमान में केंद्र में जांच के अधीन हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मेघालय अपने प्रस्तावों को, यथार्थवादी, तकनीकी रूप से सुदृढ़ और परिणामोन्मुखी सुनिश्चित करते हुए निर्धारित मानदंडों के अनुरूप बनाए रखेगा।

सतत विकास के महत्व पर बल देते हुए, उन्होंने राज्य सरकार को जल संचय योजना के तहत जल संरक्षण प्रयासों को और मजबूत करने तथा जल जीवन मिशन 2.0 को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में एमजीएनआरईजीए के तहत निधि का रणनीतिक उपयोग जल स्रोतों में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने राज्य सरकार से वीबी जी आरएएम जी निधि का उपयोग करके जल स्रोतों की स्थिरता और जल संरक्षण के उपाय करने का भी आग्रह किया, ताकि जल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने सुधारों से जुड़े समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के साथ आज विश्वास व्यक्त किया कि मेघालय, जल जीवन मिशन 2.0 के तहत समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाला बारहवां राज्य होने के नाते, जल्द ही 100 प्रतिशत नल जल कवरेज हासिल करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा। यह सुधारों और सुनिश्चित जल सेवा वितरण के प्रति मेघालय की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और जल जीवन मिशन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में नल के पानी की उपलब्धता के मामले में मेघालय कभी देश में सबसे निचले पायदान पर था, लेकिन जल जीवन मिशन के शुभारंभ के बाद से अब तक 83.59 प्रतिशत कवरेज हासिल कर चुका है। उन्होंने इस उल्लेखनीय प्रगति का श्रेय प्रधानमंत्री और जल शक्ति मंत्रालय के सशक्त समर्थन और मार्गदर्शन को दिया।
कॉनराड के. संगमा ने यह भी बताया कि राज्य ने 2019 में ही एक व्यापक जल नीति अपनाई थी और कई विभागों की सक्रिय भागीदारी से एक जलवायु परिषद का गठन किया था। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सभी सम्बंधित विभाग अब जल सम्बंधी मुद्दों के समाधान के लिए समग्र रूप से मिलकर काम कर रहे हैं। इनमें जागरूकता पैदा करना, मृदा संरक्षण और अन्य उपाय शामिल हैं। संचालन और रखरखाव की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार अधिकतम जिम्मेदारी लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
उन्होंने दोहराया कि राज्य समझौता ज्ञापन के सभी प्रावधानों को लागू करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और प्रत्येक घर में पानी की मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगा।
सुधार से सम्बंधित इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में और निर्धारित गुणवत्तापूर्ण पेयजल की नियमित रूप से उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके लिए जन भागीदारी को मजबूत किया जाएगा और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के सतत संचालन और रखरखाव के लिए संरचनात्मक सुधार लाए जाएंगे। इससे 2047 के विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार होगा और दीर्घकालिक जल सुरक्षा में योगदान मिलेगा।

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