डेस्क। भारत में वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली जीएलपी-1 आधारित दवाओं को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। देश के औषधि नियंत्रक ने इन दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में अनियमितताओं, अनधिकृत बिक्री और भ्रामक प्रचार पर रोक लगाने के लिए नियामक निगरानी तेज कर दी है। हाल के समय में भारतीय बाजार में जीएलपी-1 दवाओं के कई नए जेनेरिक वेरिएंट उपलब्ध हुए हैं, जिससे खुदरा दवा दुकानों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, थोक विक्रेताओं और स्वास्थ्य क्लीनिकों के जरिए इनकी आसान उपलब्धता बढ़ी है। इससे बिना डॉक्टर की निगरानी के उपयोग का खतरा भी बढ़ गया है, जो गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।
इस स्थिति को देखते हुए औषधि नियंत्रक ने राज्य नियामकों के साथ मिलकर कार्रवाई शुरू की है। 10 मार्च 2026 को सभी दवा निर्माताओं को एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई, जिसमें भ्रामक विज्ञापनों और अप्रत्यक्ष प्रचार पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। नियामक एजेंसियों ने अब तक देशभर में 49 संस्थानों—जिनमें ऑनलाइन फार्मेसी गोदाम, थोक विक्रेता, खुदरा दवा विक्रेता और वजन घटाने वाले क्लीनिक शामिल हैं—का निरीक्षण और ऑडिट किया है। इन जांचों का उद्देश्य अनधिकृत बिक्री, गलत प्रिस्क्रिप्शन और भ्रामक मार्केटिंग गतिविधियों को रोकना है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है। बिना चिकित्सकीय सलाह के इन दवाओं का उपयोग गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे इन दवाओं का सेवन केवल योग्य विशेषज्ञ—जैसे एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ—की देखरेख में ही करें। आगे भी इस क्षेत्र में निगरानी और सख्त की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई करने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे।
