लखनऊ। विश्व भर में नींद से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर वर्ष मनाया जाने वाला वर्ल्ड स्लीप डे इस वर्ष 13 मार्च 2026 को “अच्छी नींद लें, बेहतर जीवन जिएं” थीम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि अच्छी और पर्याप्त नींद स्वस्थ जीवन के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।विशेषज्ञों के अनुसार विश्व में लगभग 10 प्रतिशत वयस्क अनिद्रा (इंसोम्निया) से ग्रसित हैं, जबकि 3 से 7 प्रतिशत वयस्क ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से पीड़ित हैं। अनुमान है कि दुनिया भर में करीब 93 करोड़ लोग OSA से प्रभावित हैं, जिनमें से लगभग 42 करोड़ लोगों को मध्यम से गंभीर स्तर की समस्या है। यह बीमारी अक्सर समय पर पहचान में नहीं आती, जबकि यह हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मेटाबोलिक विकार और मस्तिष्क संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण बन सकती है। प्रो. वेद प्रकाश ने बताया कि नींद से जुड़ी बीमारियों की पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनके कारण हृदय रोग, शुगर, बीपी और मोटापे के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि सफलता की दौड़ में लोगों को अच्छी नींद की अनदेखी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि पर्याप्त नींद शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने बताया कि दिन में अत्यधिक नींद आना, रात में बार-बार जागना, खर्राटे आना, नींद के दौरान सांस रुकना, सिरदर्द, थकान और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण स्लीप डिसऑर्डर के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों में रेस्टलेस लेग सिंड्रोम, नींद में चलना या बोलना जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं। निद्रा विकार की पहचान के लिए क्लीनिकल हिस्ट्री, स्लीप डायरी, शारीरिक परीक्षण, STOP-BANG और ESS जैसे स्क्रीनिंग टूल्स तथा स्लीप स्टडी जैसे परीक्षण किए जाते हैं। स्लीप स्टडी को सबसे सटीक जांच माना जाता है, जिसमें मरीज की एक रात की नींद के दौरान मस्तिष्क गतिविधि, आंखों की गति, हृदय गति, सांस लेने का पैटर्न और शरीर की गतिविधियों का विश्लेषण किया जाता है। विशेषज्ञों ने बताया कि स्लीप एपनिया और अन्य निद्रा विकारों से हार्ट अटैक, हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा, लकवा, मानसिक तनाव और कार्यक्षमता में कमी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए 10–3–2–1–0 नियम अपनाने की सलाह दी। इसके अनुसार सोने से 10 घंटे पहले कैफीन से बचना, 3 घंटे पहले भारी भोजन न करना, 2 घंटे पहले तनावपूर्ण काम बंद करना, 1 घंटा पहले मोबाइल और टीवी से दूरी बनाना तथा सुबह स्नूज़ बटन का उपयोग न करना चाहिए। प्रो. ऋषि सेठी ने कहा कि पर्याप्त नींद हृदय स्वास्थ्य और रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए बेहद जरूरी है। वहीं डॉ. श्रीकांत श्रीवास्तव ने बताया कि मेलाटोनिन हार्मोन नींद को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है, जो सूर्यास्त के बाद बढ़ने लगता है। डॉ. वीरेंद्र वर्मा के अनुसार नाक में रुकावट या वायुमार्ग के संकुचन जैसी संरचनात्मक समस्याएं भी खर्राटों और स्लीप एपनिया का कारण बन सकती हैं। वहीं डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि नींद की कमी से मिर्गी के दौरे बढ़ सकते हैं, क्योंकि नींद और मिर्गी के बीच गहरा संबंध होता है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रो. राजेंद्र प्रसाद, प्रो. वेद प्रकाश, प्रो. ऋषि सेठी, प्रो. श्रीकांत श्रीवास्तव, प्रो. राजेश वर्मा, प्रो. वीरेंद्र वर्मा और प्रो. पूरन चंद्र सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में डॉ. सचिन कुमार, डॉ. मोहम्मद आरिफ, डॉ. अनुराग त्रिपाठी, डॉ. रिचा त्यागी, डॉ. यश जगधारी, डॉ. दीपक शर्मा और डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव सहित अन्य चिकित्सक भी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने समाज में नींद संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच व उपचार कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
