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बजट-उपरांत वेबिनार में संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों की संख्या बढ़ाने पर चर्चा

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डेस्क। “सबका साथ सबका विकास – जन आकांक्षाओं की पूर्ति” विषय पर आयोजित बजट-उपरांत वेबिनार श्रृंखला के अंतर्गत, पैरा 53 के अंतर्गत “संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों का विस्तार” विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में नीति निर्माताओं, नियामकों, उद्योग जगत की हस्तियों, शिक्षाविदों और राज्यों के प्रतिनिधियों ने भारत में संबद्ध स्वास्थ्य शिक्षा के विस्तार और संबद्ध स्वास्थ्य कार्यबल को सुदृढ़ करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। इस चर्चा का मुख्य केंद्र सरकार की उस महत्वाकांक्षी पहल पर था जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 1,00,000 संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (एएचपी) को शामिल किया जाएगा, जो देश भर में संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा की सुलभता, गुणवत्ता और स्थिरता में सुधार के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप है। इस सत्र का संचालन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव डॉ. विनोद कोटवाल ने किया। उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन, गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ, स्वास्थ्य सेवा संबंधी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विस्तार और उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने के कारण संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि निदान, इमेजिंग, फिजियोथेरेपी, आपातकालीन देखभाल और एनेस्थीसिया प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में कुशल संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है।
डॉ. कोटवाल ने प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए प्राथमिकता वाले विषयों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिनमें ऑप्टोमेट्री, फिजियोथेरेपी, मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज, डायलिसिस थेरेपी, रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी, रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी, एनेस्थीसिया और ओटी टेक्नोलॉजी, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, एप्लाइड साइकोलॉजी और बिहेवियरल हेल्थ और पैलिएटिव केयर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत में 500 से अधिक सरकारी संस्थानों में लगभग 48,000 सीटें उपलब्‍ध हैं, जबकि लगभग 3,800 निजी संस्थान 3.6 लाख से अधिक सीटें प्रदान करते हैं, जिनमें बुनियादी ढांचे, प्रयोगशालाओं, उपकरणों और प्रशिक्षित शिक्षकों में भिन्नता पाई जाती है। उन्होंने राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग अधिनियम, 2021 के तहत राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग द्वारा निर्धारित सभी संस्थानों में एकसमान मानकों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इस पहल का उद्देश्य डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में सीटों का विस्तार करना, एनसीएएचपी मानदंडों के अनुरूप सरकारी एएचपी संस्थानों का आधुनिकीकरण करना, प्रयोगशालाओं और सिमुलेशन सुविधाओं को मजबूत करना, संकाय की कमी को दूर करना और युवाओं में संबद्ध स्वास्थ्य व्यवसायों में कैरियर के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस प्रतिष्ठित पैनल में राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग (एनसीएएचपी) के अध्यक्ष डॉ. यज्ञ उन्मेश शुक्ला, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेठ, ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की आयुक्त-सह-सचिव, अस्‍वाति एस, एनएटीहेल्थ के महानिदेशक सिद्धार्थ भट्टाचार्य, अमृता ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स, फरीदाबाद के चिकित्सा निदेशक डॉ. संजीव सिंह, विरोहन के अकादमिक प्रमुख डॉ. अनुराग शाही, क्षेत्रीय पैरामेडिकल एवं नर्सिंग विज्ञान संस्थान (आरआईपीएएनएस), आइजोल के निदेशक डॉ. संजय दिनकर सावंत, एसआरएम मेडिकल कॉलेज अस्‍पताल एवं अनुसंधान केंद्र के संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान के डीन डॉ. डी. जगदेश्वरन, एसोसिएशन ऑफ हेल्‍थकेयर प्रोवाइडर्स (भारत) के महानिदेशक डॉ. गिरधर जे. ज्ञानी और आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर समर्थन और विकास प्रभाग के निदेशक राहुल सिंह शामिल थे।

पैनल में शामिल सदस्यों ने विशेष रूप से निदान, पुनर्वास, आपातकालीन देखभाल और रोगी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों को मजबूत करने में संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अगले पांच वर्षों में 1 लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों को जोड़ने के सरकार के निर्णय की सराहना की और मौजूदा मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने की पहल का स्वागत किया ताकि वे न केवल चिकित्सा शिक्षा बल्कि संबद्ध स्वास्थ्य और पैरामेडिकल प्रशिक्षण का समर्थन करने वाले व्यापक इकोसिस्‍टम में विकसित हो सकें। चर्चाओं में संबद्ध स्वास्थ्य सेवा शिक्षा के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विस्तार, पाठ्यक्रम के मानकीकरण, नियामक प्रणालियों को सुदृढ़ करने और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ाने के महत्व पर बल दिया गया। पैनलिस्टों ने संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों में विविध कैरियर विकल्पों के बारे में युवाओं में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि यह एक आकर्षक और व्यवहार्य कैरियर विकल्प बन सके।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि देश भर में संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों का एक विशाल और कुशल समूह जुटाया जाए ताकि वर्तमान और भविष्य की स्वास्थ्य संबंधी मांगों को पूरा किया जा सके, साथ ही संबद्ध स्वास्थ्य व्यवसायों को सम्मानजनक, पेशेवर और लाभकारी करियर मार्ग के रूप में स्थापित किया जा सके। इस संदर्भ में, यह सुझाव दिया गया कि प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए मौजूदा अस्पतालों का उपयोग किया जा सकता है और उन्हें संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षण और कौशल प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है। पैनलिस्टों ने संकाय सदस्यों की कमी को दूर करने और संबद्ध स्वास्थ्य विषयों में शिक्षण और प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों के बीच संकाय विनिमय कार्यक्रमों को मजबूत करने का भी सुझाव दिया। इस तरह के सहयोग से संस्थानों के बीच ज्ञान साझाकरण, सर्वोत्तम प्रणालियों से अवगत होने के साथ-साथ क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिल सकता है।

इस बात पर भी जोर दिया गया कि देशभर के जि‍ला मेडिकल कॉलेजों को संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान के केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज व्यवस्था और पाठ्यक्रम के कई घटक संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान प्रशिक्षण के साथ निकटता से मेल खाते हैं। इन संस्थानों को संबद्ध स्वास्थ्य शिक्षा और कौशल विकास केंद्रों के रूप में उपयोग करने से प्रशिक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों के व्यापक विकास में सहायता मिलेगी। राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (एनसीएएचपी) के संचालन में आने से संबद्ध स्वास्थ्य शिक्षा और व्यावसायिक मानकों को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है। पैनलिस्टों ने कहा कि इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने और सभी संस्थानों में मानकीकृत प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत आधार मिलता है। इस वेबिनार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ एनसीएएचपी, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी), राज्य स्वास्थ्य मंत्रालयों, उद्योग संघों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और प्रमुख संबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों के संकाय सदस्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसने केंद्रीय बजट में उल्लिखित नीतिगत दृष्टिकोण को व्यावहारिक रणनीतियों में बदलने के लिए सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के हितधारकों के बीच संवाद के लिए एक सहयोगात्मक मंच के रूप में कार्य किया। इस सत्र से प्राप्त अंतर्दृष्टि और सिफारिशें संबद्ध स्वास्थ्य सेवा शिक्षा के विस्तार और भारत की विकसित होती स्वास्थ्य सेवा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुशल कार्यबल के निर्माण की दिशा में कार्यान्वयन को लेकर एक सशक्‍त रोडमैप तैयार करने में योगदान देंगी।

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