तोताराम न्यूज़, डेस्क। हर वर्ष 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य कैंसर के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, रोकथाम को प्रोत्साहित करना तथा वैश्विक स्तर पर इस गंभीर बीमारी से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों को सशक्त बनाना है। विश्व कैंसर दिवस 2025–2027 की थीम “यूनाइटेड बाय यूनिक” (United by Unique) है, जो रोगी-केंद्रित देखभाल पर बल देती है और यह संदेश देती है कि प्रत्येक रोगी की आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर के जोखिम कारकों को दो श्रेणियों—परिवर्तनीय और अपरिवर्तनीय—में बांटा जा सकता है। परिवर्तनीय कारकों में तंबाकू और शराब सेवन, मोटापा, असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, आयनीकरण विकिरण, कार्यस्थल पर रसायनों का संपर्क तथा HPV और हेपेटाइटिस बी-सी जैसे संक्रमण शामिल हैं। वहीं बढ़ती आयु, आनुवंशिक कारण और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली अपरिवर्तनीय जोखिम कारक हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि रोग की शुरुआत शरीर के किस अंग से हुई है। असामान्य गांठ या सूजन, लगातार खांसी या सांस फूलना, बिना कारण वजन घटना, अत्यधिक थकान, बार-बार दर्द, तिल या त्वचा में बदलाव, पेशाब या मल त्याग की आदतों में परिवर्तन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच से बीमारी की पहचान संभव है, जिसमें चिकित्सकीय परीक्षण, रक्त जांच, एक्स-रे, सीटी-स्कैन, एमआरआई, पीईटी-सीटी, एंडोस्कोपी और बायोप्सी जैसी विधियाँ शामिल हैं।
कैंसर की रोकथाम पर जोर देते हुए चिकित्सकों ने धूम्रपान छोड़ने, शराब सेवन सीमित करने, स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम अपनाने, हेपेटाइटिस बी एवं HPV का टीकाकरण कराने तथा नियमित स्क्रीनिंग जांच की सलाह दी। उपचार के लिए शल्य चिकित्सा, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, लक्षित चिकित्सा, इम्यूनोथेरेपी और स्टेम सेल प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक पद्धतियाँ उपलब्ध हैं। फेफड़ों के कैंसर के संदर्भ में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। विभाग उन्नत ब्रोंकोस्कोपी, EBUS-निर्देशित जांच, इमेज-गाइडेड प्रक्रियाएँ और बहुविषयक ऑन्कोलॉजी देखभाल प्रदान करता है, जिससे शीघ्र और सटीक निदान संभव हो पाता है।विश्व कैंसर दिवस पर आयोजित प्रेस वार्ता में प्रो. (डॉ.) राजेन्द्र प्रसाद को पद्म श्री सम्मान मिलने पर विभाग की ओर से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कई वरिष्ठ विशेषज्ञ उपस्थित रहे, जिन्होंने समान रूप से उपचार उपलब्ध कराने और टीम-आधारित देखभाल मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में यह भी घोषणा की गई कि वर्ष 2026 में AIPCON का आयोजन KGMU में किया जाएगा, जो इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी के क्षेत्र में एक प्रमुख राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। आयोजकों के अनुसार यह सम्मेलन श्वसन एवं कैंसर देखभाल में नवाचार और शोध को नई दिशा देगा।