मुशायरे व संगीत ने बांधा समां
लखनऊ। पांचवें गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 में शनिवार को साहित्य, बाल रचनात्मकता, पर्यावरण, पुस्तक संस्कृति, उर्दू अदब और संगीत के विविध रंग देखने को मिले। दिनभर आयोजित कार्यक्रमों में 3500 से अधिक बच्चों ने रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया। वहीं पुस्तकालयों की उपयोगिता, पढ़ने की संस्कृति और गोमती नदी के संरक्षण पर परिचर्चाएं हुईं। शाम को उर्दू मुशायरे और रिदम एंड स्ट्रिंग्स की संगीतमय प्रस्तुति ने महोत्सव के माहौल को खास बना दिया।
बच्चों ने कहानी, गणित और रचनात्मकता से सीखा
बाल कॉर्नर में दिन की शुरुआत ‘कठपुतली के साथ कहानी’ से हुई, जिसमें राहुल, रिद्धि और कुलदीप ने दोस्ती पर आधारित कहानी को कठपुतलियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। ‘वैदिक गणित लैब फन’ में बच्चों ने रोचक तरीकों से गणित की अवधारणाओं को समझा, जबकि बिसलेरी टीम के ‘प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण’ सत्र में बच्चों को प्लास्टिक के उचित प्रबंधन और रिसाइक्लिंग के बारे में जानकारी दी गई।

राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की ‘रचनात्मक लेखन कार्यशाला’ में बच्चों को डिजिटल लाइब्रेरी प्लेटफॉर्म से परिचित कराया गया और दिए गए शब्दों के आधार पर उन्होंने अपनी कहानियां तैयार कीं। सेबी की फन क्विज के माध्यम से बच्चों को वित्तीय जागरूकता से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। बाल गतिविधियों का समापन लालबाग गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्राओं की कजरी लोक नृत्य प्रस्तुति के साथ हुआ।
पुस्तकालयों को अधिक सुलभ बनाने पर जोर
‘प्रत्येक पुस्तक को पाठक मिलें’ विषय पर परिचर्चा में पुस्तकालयों की पहुंच बढ़ाने और पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने पर विचार साझा किए गए। परिचर्चा की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश पुस्तकालय संघ, लखनऊ के अध्यक्ष एवं सचिव विनोद कुमार मिश्रा ने की, जबकि समन्वय डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के उपाध्यक्ष एवं पुस्तकालयाध्यक्ष मनीष कुमार वाजपेयी ने किया।
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के पुस्तकालय विभागाध्यक्ष डॉ. शरद सोनकर ने कहा कि विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप पुस्तकें और बेहतर अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराकर पुस्तकालयों का उपयोग बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालयों के विस्तार और तकनीक के साथ पढ़ने की आदत विकसित करने पर जोर दिया।
सीएसआईआर के वैज्ञानिक रमेश गुप्ता ने कहा कि पुस्तकों को पुस्तकालयों तक सीमित रखने के बजाय पुस्तक मेलों, स्टॉल और अन्य माध्यमों से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए। विनोद कुमार मिश्रा ने ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक पुस्तकालयों के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों की उपलब्धता और सभी वर्गों के लिए सुलभ सदस्यता की आवश्यकता बताई।मनीष कुमार वाजपेयी ने कहा कि पुस्तकालय केवल अध्ययन के स्थान नहीं हैं, बल्कि ज्ञान और जागरूकता से समृद्ध समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गोमती के उद्गम से संरक्षण तक हुई चर्चा
‘नदी ने क्या याद रखा’ संवाद में गोमती नदी के उद्गम क्षेत्र, जैव विविधता, संरक्षण और नदी से जुड़े स्थानीय जीवन पर चर्चा हुई। सत्र का समन्वय फिल्मकार सुश्री दीपिका चतुर्वेदी ने किया। इसमें पीलीभीत के कलीनगर के उपजिलाधिकारी प्रमेश कुमार भी शामिल हुए।

दीपिका चतुर्वेदी ने गोमती के उद्गम क्षेत्र और स्थानीय जैव विविधता से इसके संबंध को रेखांकित करते हुए नदी को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई। प्रमेश कुमार ने नदी की स्वच्छता, घाटों के विकास और स्थानीय भागीदारी के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उर्दू शायरी से सजी साहित्यिक संध्या
महोत्सव की साहित्यिक संध्या राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित मुशायरे के नाम रही। हास्य-व्यंग्य, सामाजिक सरोकार, रिश्तों और जिंदगी के अनुभवों से जुड़े कलाम ने श्रोताओं को बांधे रखा।
ऑल इंडिया माइनॉरिटीज फोरम फॉर डेमोक्रेसी के अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिजवी मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हसन काजमी ने की और संचालन एनसीपीयूएल के शोध सहायक डॉ. फैजानुल हक ने किया। हसन काजमी, मलिकजादा जावेद, पपलू लखनवी, मनीष शुक्ला, तारा इकबाल और चिराग सिंह बशर ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
शायर हसन काजमी ने पढ़ा-
“क्या जमाना है, कभी यूं भी सजा देता है,
मेरा दुश्मन मुझे जीने की दुआ देता है।”
शायर मलिकजादा जावेद ने बदलते वक्त और रिश्तों पर व्यंग्य करते हुए कहा
“मरीज हमको दवाएं बताने लगते हैं,
बुरा हो वक्त तो सब आजमाने लगते हैं।”
शायर पपलू लखनवी ने अपने हास्य और चुटीले अंदाज से महफिल में ठहाके बिखेर दिए। वहीं मनीष शुक्ला ने उर्दू की तहजीब और बातचीत के सलीके को अपने अंदाज में पेश किया। शायरा तारा इकबाल ने बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज के दौर में लड़कियों को पढ़ाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना दोनों जरूरी हैं।
शायर चिराग सिंह बशर ने रोशनी और अंधेरे के प्रतीक के जरिए सामाजिक संदेश दिया
“चरागों के सफर में दबदबा हो आंधियों का,
तो फिर अंजाम जुल्मत के सिवा कुछ भी नहीं है।”
इस अवसर पर डॉ. अम्मार रिजवी ने कहा कि राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद कार्यक्रमों और प्रकाशनों के माध्यम से उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कविता और मुशायरों को देश के निर्माण, सामाजिक प्रगति और साझा संस्कृति से जोड़ते हुए लखनऊ की तहजीब और उर्दू अदब के रिश्ते का भी उल्लेख किया।
रिदम एंड स्ट्रिंग्स की प्रस्तुति ने बांधा समां
दिन का समापन संगीत की जीवंत प्रस्तुति के साथ हुआ। रिदम एंड स्ट्रिंग्स बैंड ने लोकप्रिय गीतों और ऊर्जावान संगीत की प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ कलाकारों का स्वागत किया।
