डॉ. हरिओम ने साझा किए साहित्यिक अनुभव; मालिनी अवस्थी और यतींद्र मिश्र ने ‘संगीत, साहित्य और जेन जी’ पर किया संवाद
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स ग्राउंड में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव के पांचवें संस्करण के पांचवें दिन साहित्य, कहानी, रंगमंच, विज्ञान, संगीत और कविता से जुड़े कार्यक्रम हुए। चिल्ड्रन्स कॉर्नर में करीब 1,100 विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। ‘लेखक से मिलिए’ में डॉ. हरिओम ने अपने साहित्यिक अनुभव साझा किए। वहीं मालिनी अवस्थी और यतींद्र मिश्र ने ‘संगीत, साहित्य और जेन जी’ विषय पर संवाद किया। हिंदी दिवस पर विशेष कवि सम्मेलन भी आयोजित हुआ।
दास्तानगोई से विज्ञान तक बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता
चिल्ड्रन्स कॉर्नर में दास्तानगो आस्था और तस्नीम ने बच्चों को कहानी सुनाई। इसके बाद रंजीता और राहुल ने ‘रंगमंच: कल्पना और अभिनय’ के माध्यम से बच्चों को अभिनय की बारीकियों से परिचित कराया। विज्ञान सत्र में प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाया गया। ‘राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एवं कविता पाठ’ में विद्यार्थियों ने नागार्जुन, कबीर और रवींद्रनाथ टैगोर सहित विभिन्न कवियों की रचनाएं प्रस्तुत कीं। प्रतिभागियों को एनबीटी की पुस्तकें, उपहार और प्रमाण-पत्र दिए गए।
डॉ. हरिओम ने साझा किए साहित्यिक अनुभव
‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में डॉ. हरिओम ने लेखन, प्रशासन और रचनात्मक प्रक्रिया पर बातचीत की। कार्यक्रम का समन्वय एनबीटी के हिंदी संपादक डॉ. ललित किशोर मंडोरा ने किया। डॉ. हरिओम ने कहा कि प्रशासनिक सेवा के साथ साहित्य के लिए समय निकालना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन समाज और लोगों से जुड़ाव उनके लेखन को निरंतर अनुभव और विषय देता है। उन्होंने कहानी, कविता और ग़ज़ल लेखन की प्रक्रिया पर चर्चा की तथा कबीर, तुलसीदास और ग़ालिब जैसे रचनाकारों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और तीन पुस्तकों का अनुवाद हुआ है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गीत भी प्रस्तुत किए।
‘संगीत, साहित्य और जेन जी’ पर मालिनी अवस्थी और यतींद्र मिश्र का संवाद
संवाद में मालिनी अवस्थी और यतींद्र मिश्र ने नई पीढ़ी की सोच, संगीत में बदलाव, गुरु-शिष्य परंपरा और साहित्य में अनुशासन पर चर्चा की। मालिनी अवस्थी ने लखनऊ से अपने जुड़ाव और लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्ययन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पीढ़ियां बदलने के बावजूद सीखने की इच्छा बनी रहती है। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़े अनुभव साझा करते हुए दादरा की प्रस्तुति भी दी।

यतींद्र मिश्र ने नई पीढ़ी से संवाद और विभिन्न पीढ़ियों के बीच समझ को महत्वपूर्ण बताया। दोनों वक्ताओं ने साहित्य और संगीत को युवाओं से जोड़ने के लिए संवाद और प्रस्तुति के बदलते तरीकों की आवश्यकता पर जोर दिया।
हिंदी दिवस पर विशेष कवि सम्मेलन
हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन का संचालन फरीदाबाद के कवि मंजीत सिंह ने किया। चिराग़ जैन, पंकज प्रसून, सर्वेश अस्थाना, डॉ. मालविका हरिओम और मनीषा शुक्ला ने काव्य पाठ किया।
मनीषा शुक्ला ने कहा— “जीवन इक अभ्यास है, अनुभव एक किताब।”
सर्वेश अस्थाना ने साहस और संघर्ष को अपनी पंक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। चिराग़ जैन ने हिंदी कविता और कवि के संघर्ष को केंद्र में रखा। अन्य कवियों की प्रस्तुतियों ने भी श्रोताओं की सराहना बटोरी।
संगीत और नृत्य से सजी शाम
महोत्सव की शाम में ‘बज़्म-ए-इश्क़’ में हज़रत अमीर ख़ुसरो की रचनाओं ‘अरी सखी मोरे पिया घर आए’ और ‘छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाइके’ को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नृत्य निर्देशन एवं कोरियोग्राफी डॉ. सुरभि शुक्ला ने की। तबले पर डॉ. राजीव शुक्ला तथा संगीत संयोजन एवं गायन में पंडित रवि नागर ने संगत की। इसके बाद आकाशवाणी दिल्ली के युवा कलाकार देवानंद झा ने गायन प्रस्तुति दी।
