गोरखपुर के बुढ़िया माता से अमेठी के तपेश्वरनाथ तक…भविष्य की नई योजनाओं पर मंथन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2026-27 की पर्यटन विकास योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी क्रम में मंगलवार को पर्यटन भवन में बैठक के दौरान पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित एस्टिमेट्स का एक दिन के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और स्वीकृत सभी परियोजनाओं के शिलान्यास की प्रक्रिया दशहरा तक शुरू की जाए।।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, उनके एस्टिमेट से जुड़ी लंबित कार्रवाई में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभाग का उद्देश्य स्वीकृत पर्यटन परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर जमीन पर उतारना है, ताकि प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार और पर्यटकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं जल्द उपलब्ध हो सकें।
पर्यटन परियोजनाओं की स्वीकृति के बाद क्रियान्वयन में न हो अनावश्यक देरी : जयवीर सिंह
बैठक में भविष्य की पर्यटन योजनाओं के तहत शामिल की जाने वाली विभिन्न परियोजनाओं के प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इनमें गोरखपुर के बुढ़िया माता मंदिर, आगरा की वाल्मीकि वाटिका और अमेठी के तपेश्वरनाथ मंदिर के विकास से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख रहे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां और औपचारिकताएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा विभागीय की परियोजनाओं की स्वीकृति के बाद उनके क्रियान्वयन में अनावश्यक अंतर न रहे और निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़े।
अपर मुख्य सचिव एवं पर्यटन महानिदेशक अमृत अभिजात ने भी अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण कार्य के साथ टाइम बाउंड तरीके से परियोजनाओं को पूरा करने पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए और प्रत्येक परियोजना की प्रगति निर्धारित समय के अनुसार सुनिश्चित की जाए। बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार सहित पर्यटन विभाग के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
