घर खरीददारों को रेरा कानून, कानूनी अधिकार और सुरक्षित निवेश के टिप्स
लखनऊ / गौतमबुद्धनगर। उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण ने अपनी जागरूकता मुहीम को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में घर खरीददारों के लिए संवाद एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य घर खरीददारों को रेरा अधिनियम के प्रावधानों, उनके अधिकारों व सुरक्षित रियल एस्टेट निवेश के प्रति जागरूक करना था। मेरठ मंडल के लिए आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता यूपी रेरा के अध्यक्ष श्री संजय भूसरेड्डी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की।
जागरूक उपभोक्ता ही सुरक्षित निवेश की कुंजी : संजय भूसरेड्डी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूपी रेरा के अध्यक्ष श्री संजय भूसरेड्डी ने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य केवल विवादों का समाधान करना नहीं, बल्कि घर खरीददारों को उनके कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों से अवगत कराना भी है। उन्होंने कहा कि जब उपभोक्ता पूरी जानकारी के साथ निर्णय लेते हैं तो वे अपने निवेश को अधिक सुरक्षित बना सकते हैं।
उन्होंने घर खरीददारों से आग्रह किया कि किसी भी आवासीय परियोजना में निवेश से पहले रेरा पोर्टल पर उपलब्ध सभी जानकारियों का सत्यापन अवश्य करें। साथ ही यदि किसी प्रकार की समस्या या विवाद उत्पन्न हो तो बिना विलंब यूपी रेरा से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता हितैषी रियल एस्टेट व्यवस्था विकसित करने के लिए यूपी रेरा लगातार प्रभावी प्रयास कर रहा है।
पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से दी गई विस्तृत जानकारी
कार्यशाला के दौरान यूपी रेरा के प्रमुख सलाहकार श्री अबरार अहमद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पावर पॉइंट प्रस्तुति देकर प्रतिभागियों को रेरा अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों से अवगत कराया। उन्होंने निवेश से पहले आवश्यक दस्तावेजों की जांच, खरीददारों के अधिकार, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा किन परिस्थितियों में रेरा से संपर्क करना चाहिए, इस संबंध में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यदि खरीदार परियोजना से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियों का पहले से सत्यापन कर लें तो वे धोखाधड़ी और अनावश्यक विलंब जैसी समस्याओं से काफी हद तक बच सकते हैं।
निवेश से पहले इन बिंदुओं की जांच जरूरी
प्रतिभागियों को सलाह दी गई कि किसी भी परियोजना में निवेश करने से पूर्व उसकी रेरा पंजीकरण संख्या, पंजीकरण की वैधता, स्वीकृत मानचित्र, भूमि स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, परियोजना की प्रगति, प्रस्तावित पूर्णता अवधि, परियोजना के बैंक खाते, प्रमोटर का पूर्व रिकॉर्ड तथा संबंधित एजेंट के रेरा पंजीकरण की जानकारी अवश्य जांचें। साथ ही आकर्षक एवं भ्रामक विज्ञापनों के आधार पर निर्णय लेने से बचने की भी सलाह दी गई।
खरीद के बाद दस्तावेज सुरक्षित रखने पर दिया गया विशेष बल
कार्यक्रम में बताया गया कि बुकिंग के बाद भी खरीदारों को परियोजना की प्रगति पर नियमित नजर रखनी चाहिए। एग्रीमेंट फॉर सेल, आवंटन पत्र, भुगतान रसीदें, रेरा पोर्टल पर उपलब्ध अपडेट्स और अन्य संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना आवश्यक है, क्योंकि भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में यही अभिलेख उनके अधिकारों की रक्षा का आधार बनते हैं।
रेरा अधिनियम के तहत उपलब्ध अधिकारों की दी गई जानकारी
कार्यशाला में घर खरीददारों को उनके कानूनी अधिकारों से विस्तार से अवगत कराया गया। बताया गया कि प्रत्येक खरीदार को परियोजना संबंधी सही एवं पारदर्शी जानकारी प्राप्त करने, रेरा निर्धारित प्रारूप में एग्रीमेंट फॉर सेल कराने, निर्धारित समय पर रजिस्ट्री सहित कब्जा प्राप्त करने, देरी होने पर ब्याज पाने, अनुबंध का पालन न होने पर धनवापसी प्राप्त करने तथा भ्रामक विज्ञापनों से हुई क्षति पर क्षतिपूर्ति मांगने का अधिकार है। इसके साथ ही फॉर्म-एम और फॉर्म-एन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
विवाद की स्थिति में रेरा से संपर्क करने की सलाह
प्रतिभागियों को बताया गया कि यदि प्रमोटर अनुबंध का पालन न करे, भ्रामक विज्ञापन जारी करे, स्वीकृत नक्शे में नियमों के विपरीत बदलाव करे, अनुचित भुगतान की मांग करे, बिना वैध कारण आवंटन निरस्त करे अथवा परियोजना या एजेंट का रेरा पंजीकरण न हो, तो ऐसे मामलों में सीधे यूपी रेरा से शिकायत कर कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
