वीरेंद्र कुमार मिश्र “विरही”
तूफान गमों के आते हैं ,तूफान गमों के जाते हैं।
कुछ लोग उसी में डूब गए ,कुछ लोग किनारे आते हैं।
गम के आंधी से टूट गए ,घर कुछ लोगों के छूट गए।
मंजिल मिलती कुछ लोगों को, कुछ के ही सपने टूट गए।
कुछ की तो खत्म कहानी ही, कुछ गम से दिल बहलाते हैं।
जो हार न माने अड़े रहे ,वे वीर पुरुष कहलाते हैं।…….
सुख -दुःख को आना जाना है, दुनिया का यही फसाना है।
अपनी जिद पर तूं जीता जा, गम को भी एक दिन जाना है।
जो बादल सागर को सोखें ,एकदिन जल भी बरसाते हैं।…….
जो डरा मारा ‘विरही’जानों, उसकी न रही निशानी है।
जो आंधी तूफानों से लड़ा ,उसकी ही अमर कहानी है।
तूफानों से जो जीत गए ,दुनिया को राह दिखाते हैं।…..
