डेस्क। संस्कृति मंत्रालय स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छ और हरित भारत की परिकल्पना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा मना रहा है। इस अवसर के उपलक्ष्य में, मंत्रालय के अधीन संगठनों द्वारा कई गतिविधियां शुरू की जा चुकी हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई, जिसमें स्वच्छता बनाए रखने के प्रति व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया गया। शपथ के दौरान, प्रतिभागियों ने अपने आसपास के परिवेश को साफ रखने के लिए दूसरों को प्रेरित करने के तरीकों पर भी चर्चा की और एक स्वच्छ राष्ट्र के निर्माण में सामुदायिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया। संस्कृति मंत्रालय में स्वच्छता और सफाई जागरूकता पर एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय पुस्तकालय ने स्वच्छता प्रतिज्ञा का संचालन , निबंध लेखन जैसी जागरूकता प्रतियोगिताएं और अपने परिसर में स्वच्छता अभियान जैसी गतिविधियां शुरू की हैं। राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद और देश भर में इसकी इकाइयों ने स्वच्छता प्रतिज्ञा समारोह, स्वच्छता अभियान, जागरूकता रैलियां, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं, चित्रकला प्रतियोगिताएं और सामुदायिक भागीदारी कार्यक्रम जैसी कई गतिविधियां शुरू की हैं , जिनका उद्देश्य व्यवहार परिवर्तन और सतत प्रथाओं को बढ़ावा देना है। मंत्रालय के अधीन संगठनों ने पखवाड़े के दौरान कई तरह की गतिविधियों की योजना बनाई है , जिनमें शामिल हैं:
- धरोहर स्थलों, संग्रहालयों, परिसरों, सार्वजनिक स्थानों और नदी तटवर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर श्रमदान और स्वच्छता अभियान चलाना।
- स्वच्छता रैलियों, पदयात्राओं , पैदल मार्च और प्लॉगिंग गतिविधियों के माध्यम से जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- नुक्कड़ नाटक , सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता अभियान जनता के बीच स्वच्छता के संदेश को बढ़ावा देना।
- “अपशिष्ट से धन” और “अपशिष्ट से कला” कार्यशालाएं पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देना।
- समुद्र तटों की सफाई, जल निकायों की सफाई और सार्वजनिक शौचालयों सहित सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव जैसी विशेष पहल।
- ” एक पौधा मां के नाम ” जैसी थीम के तहत वृक्षारोपण अभियान और हरित पहल
- छात्रों, कर्मचारियों और आगंतुकों को आकर्षित करने के लिए निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला और नारा लेखन सहित प्रतियोगिताएं आयोजित करना।
- एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को अपनाने को बढ़ावा देने वाले अभियान।
- विद्यालयों, स्थानीय निकायों और नगरपालिका अधिकारियों के सहयोग से सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम।
- स्वच्छता को सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यावरण स्थिरता से जोड़ने वाले विरासत भ्रमण, व्याख्यान और कार्यशालाएं।
विक्टोरिया मेमोरियल हॉल, इंडियन म्यूजियम, सालार जंग म्यूजियम, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, जोनल कल्चरल सेंटर्स और अन्य संस्थान पखवाड़े के तहत ये पहल कर रहे हैं । मंत्रालय के अधीन अन्य संगठन भी आंतरिक स्वच्छता उपाय करेंगे, जिनमें पुराने रिकॉर्डों को हटाना, अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं में सुधार करना और कार्यालय परिसरों का बेहतर रखरखाव सुनिश्चित करना शामिल है।
इस पहल का उद्देश्य न केवल भौतिक स्वच्छता को बढ़ाना है, बल्कि नागरिकों में भारत की सांस्कृतिक विरासत को स्वच्छ और सतत ढंग से संरक्षित करने के लिए जिम्मेदारी और सामूहिक कार्रवाई की एक स्थायी भावना पैदा करना भी है। संस्कृति मंत्रालय नागरिकों, सांस्कृतिक संस्थानों और युवा संगठनों सहित सभी हितधारकों से स्वच्छ्ता पखवाड़े में सक्रिय रूप से भाग लेने और स्वच्छ एवं स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान देने का आग्रह करता है।
