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PMGSY-IV योजना शुरू: शिवराज सिंह चौहान का मध्यप्रदेश को बड़ा तोहफा

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मोहन यादव बोले- क्षेत्र की हर विकास मांग पूरी करने का प्रयास होगा

मध्य प्रदेश। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में PMGSY-IV का शुभारंभ करते हुए राज्य को सड़क, आवास और ग्रामीण विकास की अनेक बड़ी सौगातें समर्पित कीं। इस अवसर पर म.प्र. के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान सहित राज्य के मंत्री करण सिंह वर्मा तथा विधायकगण भी उपस्थित रहे।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित इस समारोह में PMGSY-IV का शुभारंभ करते हुए कहा कि गांव की सड़क केवल रास्ता नहीं, बल्कि समृद्धि, सम्मान, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, बाजार और अवसर का प्रवेश-द्वार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में उन्होंने यह संदेश भी दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार गांव, गरीब, किसान और बहनों के जीवन में ठोस बदलाव लाने के लिए संकल्पबद्ध है।
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत वैभवशाली, गौरवशाली, आत्मनिर्भर, संपन्न और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में म.प्र. को PMGSY-IV के तहत 2,117.52 किलोमीटर लंबाई की 973 सड़कों की मंजूरी मिली, जिनकी कुल लागत 1763.08 करोड़ रु. है और जिनसे 987 बसावटों को लाभ होगा। इसी क्रम में विदिशा क्षेत्र को 600.393 किलोमीटर लंबाई की 259 सड़कें स्वीकृत हुईं, जिनसे 264 बसावटों को लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विदिशा संसदीय क्षेत्र में 500 करोड़ रु. से अधिक की सड़कें बनेंगी और उनकी प्राथमिकता है कि कोई भी गांव सड़क से वंचित न बचे। उन्होंने यह भी साफ कहा कि PMGSY के मापदंड में आने वाली म.प्र. की सभी पात्र सड़कें स्वीकृत की जाएंगी।
PM-JANMAN के तहत 384.34 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं को 261.81 करोड़ रु. की मंजूरी मिली है, जिनसे 168 बसावटें लाभान्वित होंगी। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के लिए PMGSY के कुल 18,907 करोड़ रु. के सांकेतिक आवंटन में से 830 करोड़ रु. म.प्र. को दिए गए हैं, जिसे शिवराज सिंह चौहान ने राज्य की विकास रफ्तार को नई ऊर्जा देने वाला कदम बताया।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 2055 करोड़ रु. की मदर सैंक्शन मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंपते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई गरीब बिना पक्के घर के न रहे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए सर्वे के आधार पर पात्र परिवारों का भौतिक सत्यापन कर उन्हें आवास योजना का लाभ दिया जाएगा, ताकि गरीब की छत का सपना अधूरा न रहे।
बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति दीदी अभियान को और तेजी दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प और मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिबद्धता के साथ म.प्र. में हर दीदी को आय, सम्मान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने में सरकार कोई कमी नहीं छोड़ेगी। किसानों के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गेहूं खरीदी में किसी पात्र किसान के साथ अन्याय नहीं होगा, लंबित सत्यापन का निपटारा होगा और किसानों की उपज की खरीदी सुनिश्चित की जाएगी, साथ ही भूमि अधिग्रहण के मामलों में अधिक लाभकारी तंत्र बनाने की दिशा में भी प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक सांस है, तब तक जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करते हुए उनका अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि म.प्र. सरकार, भारत सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है और जनता व जनप्रतिनिधियों की जो व्यवहारिक मांगें सामने आई हैं, उन्हें पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। श्री चौहान ने मंच से क्षेत्रीय मांगों पर सकारात्मक संकेत दिए। नर्मदा जल को शेष गांवों तक पहुंचाने, स्थानीय सड़कों की स्वीकृति, पट्टा वितरण, शिक्षा संस्थानों की मांग, मंदिर क्षेत्रों में सुविधाओं के विकास और सिंचाई परियोजनाओं जैसे मुद्दों पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समन्वित रुख दिखाया।
केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने पिछले 25 वर्षों में ग्रामीण भारत की विकास यात्रा को नई दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और सामाजिक सशक्तिकरण तक पहुंच सुनिश्चित करने का मजबूत आधार बना है। डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि PMGSY-IV के माध्यम से दूरस्थ एवं पिछड़े क्षेत्रों तक बेहतर सड़क संपर्क पहुंचने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बड़े राज्यों को सम्मान

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत पिछले 25 वर्षों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बड़े राज्यों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। योजना के तहत सर्वाधिक सड़क लंबाई पूर्ण करने की श्रेणी में मध्य प्रदेश (90,766 किमी) को प्रथम, राजस्थान (75,868 किमी) को द्वितीय तथा उत्तर प्रदेश (75,695 किमी) को तृतीय स्थान के लिए सम्मानित किया गया। सर्वाधिक बसावटों को जोड़ने की श्रेणी में बिहार (31,287) को प्रथम, मध्य प्रदेश (17,493) को द्वितीय तथा ओडिशा (16,990) को तृतीय स्थान दिया गया। हरित प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग में गुजरात (98.42 प्रतिशत), तमिलनाडु (98.39 प्रतिशत) तथा हरियाणा (97.92 प्रतिशत) को सम्मानित किया गया। ग्रामीण सड़कों के रखरखाव में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश (654 करोड़ रुपये), बिहार (553 करोड़ रुपये) और पश्चिम बंगाल (497.62 करोड़ रुपये) को सम्मान दिया गया। वहीं, गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मध्य प्रदेश को प्रथम, राजस्थान एवं तमिलनाडु को द्वितीय तथा गुजरात को तृतीय स्थान दिया गया। दोष दायित्व अवधि के बाद ग्रामीण सड़कों के रखरखाव की श्रेणी में मध्य प्रदेश (1044 करोड़ रुपये), छत्तीसगढ़ (490 करोड़ रुपये) तथा उत्तर प्रदेश (284 करोड़ रुपये) को सम्मानित किया गया।

उत्तर-पूर्वी, पहाड़ी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की उपलब्धियों को भी मिला सम्मान

उत्तर-पूर्वी, पहाड़ी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की श्रेणी में सर्वाधिक सड़क लंबाई पूर्ण करने के लिए असम (32,169 किमी), हिमाचल प्रदेश (23,081 किमी) तथा उत्तराखंड (21,874 किमी) को सम्मानित किया गया। सर्वाधिक बसावटों को जोड़ने में असम (13,720), हिमाचल प्रदेश (2,556) तथा ओडिशा (2,132) को सम्मान दिया गया। हरित प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग के लिए उत्तराखंड (75 प्रतिशत), असम (74 प्रतिशत) और मेघालय (71 प्रतिशत) को सम्मानित किया गया। ग्रामीण सड़कों के रखरखाव में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए असम (357 करोड़ रुपये), उत्तराखंड (151 करोड़ रुपये) तथा जम्मू-कश्मीर (132 करोड़ रुपये) को सम्मान दिया गया। वहीं, गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अंडमान एवं निकोबार, लद्दाख एवं पुडुचेरी को प्रथम, सिक्किम को द्वितीय तथा त्रिपुरा को तृतीय स्थान के लिए सम्मानित किया गया।

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